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    भौम प्रदोष पर राशि अनुसार करें इन शिव मंत्रों का जप, दूर होंगे जीवन के सारे कष्ट

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 06:45 PM (IST)

    भौम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026 को है। इस दिन महादेव की कृपा पाने के लिए अपनी राशि के अनुसार विशेष मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है। ...और पढ़ें

    भौम प्रदोष व्रत पर करें इन मंत्रों का जप (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। इस दिन भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा करने और मंत्रों का जप करने से जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां खत्म हो सकती हैं। हर महीने के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल) की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है।

    इस बार क्यों खास है यह व्रत?

    वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 28 अप्रैल 2026 को वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी है। चूंकि यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे 'भौम प्रदोष व्रत' कहा जाएगा। इस दिन शिवलिंग की पूजा के साथ अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जप करने से शिव जी की विशेष कृपा मिलती है।

    राशि के अनुसार मंत्रों की लिस्ट

    अपनी राशि के अनुसार नीचे दिए गए मंत्रों का जप करें:

    मेष राशि: ॐ महाकाल नमः और ॐ पूर्णानन्दाय नमः

    वृषभ राशि: ॐ उमापति नमः और ॐ महामतये नमः

    मिथुन राशि: ॐ भोलेनाथ नमः और ॐ पूर्णबोधाय नमः

    कर्क राशि: ॐ चंद्रधारी नमः और ॐ भीमाय नमः

    सिंह राशि: ॐ ज्योतिलिंग नमः और ॐ लोकनाथाय नमः

    कन्या राशि: ॐ त्रिनेत्रधारी नमः और ॐ सुरेशाय नमः

    तुला राशि: ॐ केदारनाथ नमः और ॐ कपिराजाय नमः

    वृश्चिक राशि: ॐ सोमनाथ नमः और ॐ वीराय नमः

    धनु राशि: ॐ महेश नमः और ॐ ब्रह्मण्याय नमः

    मकर राशि: ॐ नागधारी नमः और ॐ रामदूताय नमः

    कुंभ राशि: ॐ नीलेश्वर नमः और ॐ हनुमते नमः

    मीन राशि: ॐ गोरीशंकर नमः और ॐ अञ्जनापुत्राय नमः

    प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में इन मंत्रों का जप करना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है।

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    (Image Source: AI-Generated)

    भौम प्रदोष व्रत 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और आवश्यक नियम

    वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे 'भौम प्रदोष व्रत' कहा जाता है।

    त्रयोदशी तिथि और पूजा का समय:

    तिथि का आरंभ: 28 अप्रैल, शाम 06:51 बजे से

    तिथि का समापन: 29 अप्रैल, रात 07:51 बजे तक

    प्रदोष काल (पूजा का मुहूर्त): शाम 06:54 बजे से रात 09:04 बजे तक

    दिन के अन्य प्रमुख मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:17 से 05:00 बजे तक

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:31 से 03:23 बजे तक

    गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:53 से 03:23 बजे तक

    निशिता मुहूर्त: रात 11:57 से 12:40 बजे तक (29 अप्रैल)

    भौम प्रदोष व्रत के महत्वपूर्ण नियम

    भगवान शिव की कृपा और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:

    • मंगल ग्रह का संबंध ऊर्जा और उग्रता से होता है। इसलिए इस दिन गुस्सा करना, झूठ बोलना या बहस करना अशुभ माना जाता है। अपना व्यवहार पूरी तरह शांत और संयमित रखें।
    • माता-पिता, गुरु, बुजुर्गों या किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति का भूलकर भी अपमान न करें। सेवा, दया और सम्मान का भाव रखने से ही महादेव प्रसन्न होते हैं।
    • छल-कपट, चोरी या किसी को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों से पूरी तरह दूर रहें। आत्मशुद्धि के लिए बुरी संगति और नकारात्मक विचारों से बचना जरूरी है।
    • व्रत के दिन शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। इससे मन में एकाग्रता बनी रहती है और पूजा का पूरा पुण्य प्राप्त होता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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