बुधवार को करें बुध स्तोत्र का पाठ, गणेश जी और बुध देव की कृपा से मिलेगी हर कार्य में सफलता
बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध देव को समर्पित है। जानें कैसे 'बुध स्तोत्र' (Budh Stotra) का पाठ आपकी कुंडली में बुध ग्रह को मजबूत करता है। ...और पढ़ें

बुध स्तोत्र का पाठ (Image Source: AI-Generated)
HighLights
बुधवार को गणेश जी और बुध ग्रह की एक साथ पूजा से जीवन में सुख और समृद्धि आती है
कमजोर बुध को मजबूत करने के लिए 'बुध स्तोत्र' का पाठ सबसे सरल विधि है
यह पाठ वाणी दोष को दूर करता है और विवेक को जागृत करता है
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर बुधवार के दिन विघ्नहर्ता गणेश जी के साथ बुध देव की संयुक्त रूप से पूजा की जाए, तो साधक को दोहरे लाभ मिलते हैं। जहां गणेश जी जीवन की बाधाएं हर लेते हैं। वहीं, बुध देव व्यक्ति को कुशाग्र बुद्धि और बेहतर निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करते हैं।
बुध स्तोत्र के पाठ के चमत्कारी लाभ
कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति को मजबूत करने के लिए 'बुध स्तोत्र' का पाठ रामबाण उपाय माना गया है। इसके नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
बौद्धिक विकास: छात्र और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए यह स्तोत्र एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने में सहायक है।
करियर में तरक्की: व्यापार और कार्यक्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और उन्नति के नए मार्ग खुलते हैं।
वाणी में निखार: समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और व्यक्ति अपनी बातों से दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता पाता है।
सफलता की कुंजी: भगवान गणेश और बुध देव की कृपा से व्यक्ति को जीवन के हर मोड़ पर मनचाही सफलता प्राप्त होती है।

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बुध स्तोत्र का पाठ (Budh Stotra lyrics)
पीताम्बर: पीतवपु किरीटी, चतुर्भुजो देवदु:खापहर्ता ।
धर्मस्य धृक सोमसुत: सदा मे, सिंहाधिरुढ़ो वरदो बुधश्च ।।1।।
प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम ।।2।।
सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित: ।
सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम ।।3।।
उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति: ।
सूर्यप्रियकरोविद्वान पीडां हरतु मे बुधं ।।4।।
शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुन: ।
सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु ।।5।।
श्याम: शिरालश्चकलाविधिज्ञ:, कौतूहली कोमलवाग्विलासी ।
रजोधिको मध्यमरूपधृक स्या-दाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्र: ।।6।।
अहो चन्द्रासुत श्रीमन मागधर्मासमुदभव: ।
अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहु: खड्गखेटकधारक: ।।7।।
गदाधरो नृसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित: ।
केतकीद्रुमपत्राभ: इन्द्रविष्णुप्रपूजित: ।।8।।
ज्ञेयो बुध: पण्डितश्च रोहिणेयश्च सोमज: ।
कुमारो राजपुत्रश्च शैशवे शशिनन्दन: ।।9।।
गुरुपुत्रश्च तारेयो विबुधो बोधनस्तथा ।
सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद: ।।10।।
एतानि बुधनामानि प्रात: काले पठेन्नर: ।
बुद्धिर्विवृद्धितां याति बुधपीडा न जायते ।।11।।
।। इति मंत्रमहार्णवे बुधस्तोत्रम ।।
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