Shukravar Vrat से दूर होगी पैसों की तंगी, मां लक्ष्मी भर देंगी खुशियों से झोली, पढ़ें सही विधि और नियम
Friday Fasting Rules: शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। अगर आप आर्थिक संकट और वैवाहिक कलह की कमी से जूझ रहे हैं, तो शुक्रवार का व् ...और पढ़ें

Friday Fasting: मां लक्ष्मी की कृपा के लिए करें शुक्रवार व्रत (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का व्रत (Friday Fast) विशेष रूप से सुख-शांति और वैभव की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह व्रत न केवल मां लक्ष्मी (Maa Laxmi) को प्रसन्न करता है, बल्कि कुंडली में शुक्र ग्रह को भी मजबूती प्रदान करता है।
व्रत का संकल्प और शुरुआत
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शुक्रवार का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से शुरू करना सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि संतोषी माता (Santoshi Mata) या वैभव लक्ष्मी के रूप में मां की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं। आमतौर पर 11, 21 या 31 शुक्रवारों तक व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है।
पूजन की सरल विधि
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शुक्रवार के दिन (Shukravar Ke Din) ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें लाल फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां को सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है, क्योंकि सफेद रंग शुक्र देव और माता लक्ष्मी को प्रिय है।
व्रत के नियम और भोजन
इस व्रत में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन (फलाहार या बिना नमक का भोजन) करना चाहिए। पुराणों के अनुसार, शुक्रवार के दिन खट्टी चीजों का सेवन वर्जित माना गया है। अगर आप खट्टा खाते हैं, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
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उद्यापन की विधि
जब आपके संकल्पित शुक्रवार पूरे हो जाएं, तो अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उद्यापन के दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराना और उन्हें सुहाग की सामग्री या उपहार देना अनिवार्य है। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर स्थायी सुख और ऐश्वर्य का आशीर्वाद देती हैं।
शुक्रवार व्रत के चमत्कारी लाभ
कर्ज से मुक्ति मिलती है और धन के आगमन के नए रास्ते खुलते हैं।
पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और आपसी कलह दूर होती है।
कुंडली में शुक्र मजबूत होता है, जिससे भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
योग्य संतान की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत लाभकारी माना गया है।
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