सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, गरुड़ पुराण के ये 10 नियम बनाते हैं आपको एक सच्चा सनातनी
सनातन धर्म के 10 मूलभूत सिद्धांत, जिन्हें हर सच्चे सनातनी को जानना चाहिए। इसमें मनुष्य जन्म की दुर्लभता, कर्मफल, आत्मा की अमरता और मोक्ष प्राप्ति के ल ...और पढ़ें
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सनातन धर्म से जुड़े 10 प्रमुख सिद्धांत (Picture Credits- AI Image)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक सनातन धर्म में देवी-देवताओं को ईश्वर के रूप में पूजा जाता है। इस धर्म से जुड़े लोगों को हिंदू कहा जाता है। हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा, जप, तप, ध्यान, दान और सेवा को सबसे बड़ा माना जाता है।
सनातन धर्म का असल मतलब जो शाश्वत हो और हमेशा के लिए सच हो। जैसे सत्य सनातन, ईश्वर ही सत्य है, आत्मा सत्य है, मोक्ष सत्य है और इस सच को राह दिखाने वाले धर्म को सनातन धर्म कहा गया है।
हिंदू धर्म से जुड़े अत्यंत पवित्र पुराण और ग्रंथों के अनुसार एक सच्चे सनातनी को हिंदू धर्म से जुड़ी 10 बातें पता होनी चाहिए। आइए जानते हैं कौन-सी हैं वो 10 ऐसी बातें जो सदियों बाद भी प्रसांगिक है।
मनुष्य जन्म बेहद दुर्लभ है
गरुड़ पुराण के अनुसार, मनुष्य योनि में जन्म लेना सौभाग्य का विषय माना जाता है, क्योंकि इस योनि में जन्म लेने से पहले व्यक्ति को 84 लाख तमाम प्रकार की योनियों से होकर गुजरन पड़ता है। मनुष्य योनि ही एक मात्र ऐसी योनि है, जिसमें कर्म करके मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए जीवन सिर्फ भोग-विलास में ही नहीं, बल्कि धर्म और सत्कर्म में लगाना चाहिए।
हर कर्म का फल जरूर मिलता है
हिंदू धर्म के अनुसार, व्यक्ति द्वारा किया गया कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता है। उस कर्म का फल उसे इस जन्म या अगले जन्म में जरूर मिलता है। इसलिए कर्म करने से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए।
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मृत्यु अंत नहीं सिर्फ एक बदलाव है
गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा न जन्म लेती है और न ही मरती है। मृत्यु में केवल शरीर नष्ट होता है, आत्मा नहीं। आत्मा शाश्वत है, जो मरने के बाद भी अपनी यात्रा जारी रखती है।
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पाप और पुण्य दोनों साथ चलते हैं
हिंदू धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, पैसा-पद और परिवार यहीं रह जाते हैं, लेकिन पाप और पुण्य आत्मा के साथ जाते हैं। वही आगे की गति को तय करने का काम करते हैं।
माता-पिता और गुरु का सम्मान ही धर्म
हिंदू धर्म और दर्शन के मुताबिक, जो व्यक्ति अपने माता-पिता का सम्मान, गुरु और धर्म के नियमों का पालन करता है, उसका जीवन सदैव कल्याणकारी माना गया है। इसलिए भूलकर भी अपने से बड़ों के साथ गलत तरीके से पेश नहीं आना चाहिए।
निस्वार्थ भाव का दान ही फल देता है
दान करना और दान का दिखावा करना दोनों अलग चीज है। हिंदू धर्म के अनुसार, केवल दान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि योग्य पात्र, श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से किया गया दान ही फल प्रदान करता है, जिसे शास्त्रों में भी श्रेष्ठ माना गया है।
लोभ, क्रोध और अहंकार पतन का कारण
हिंदू शास्त्रों में मनुष्य के पतन कारण कोई और नहीं बल्कि उसका लोभ, क्रोध और अहंकार को बताया गया है। इन दोषों से मनुष्य धर्म भटक जाता है और अपने ही दुख का कारण बनता है। गरुड़ पुराण में इन दोषों से बचने की सलाह दी जाती है।
धर्म पूजा ही नहीं, आचरण भी
हिंदू धर्म में पूजा, जप और तप को करना ही सर्वश्रेष्ठ नहीं माना गया है, बल्कि इसके साथ व्यक्ति को अपने आचरण में सत्य, दया, संयम और सदाचार की भावना को भी शामिल करना चाहिए। क्योंकि धर्म का असल मतलब पूजा करना ही नहीं, बल्कि अच्छे आचरण को भी शामिल करना है।
भगवान का स्मरण
गरुड़ पुराण में ईश्वर के नाम जप का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान को याद करना जीवन और मृत्यु दोनों में कल्याणकाली माना जाता है। नाम जप करने से व्यक्ति अपने बुरे कर्मों को काटता है और सत्य कर्मों के प्रति प्रेरित होता है।
मोक्ष ही जीवन का असल लक्ष्य
गरुड़ पुराण के अनुसार, मनुष्य का उद्देश्य सिर्फ भौतिक सुख-सुविधा का भोग करना नहीं है, बल्कि जन्म-मरण के चक्र से भी मुक्ति पाना है, इसलिए व्यक्ति को धर्म, भक्ति और सत्कर्म का मार्ग अपनाना चाहिए।
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