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शास्त्रों के अनुसार तुलसी दल का चयन कैसे करें? पूजा का पूरा फल पाने के लिए पढ़ें सही विधि

Updated: Sat, 15 Aug 2026 12:29 PM (GMT+05:30)

हिंदू धर्म में तुलसी दल तोड़ने के सही तरीके, मंत्र और किन दिनों में इसे तोड़ने से बचना चाहिए? तुलसी का विशेष महत्व है और इसकी पूजा के लिए सही विधि का पालन करना आवश्यक है।

तुलसीदल के प्रयोग से जुड़ी संपूर्ण विधि

तुलसीदल के प्रयोग से जुड़ी संपूर्ण विधि

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र पौधों माना जाता है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर भगवान की पूजा अर्चना में किया जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में तुलसी पौधे की पूजा का विधान है। अधिकतर लोग पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उसे चयन करने और तोड़ने से जुड़े नियमों के बारे में जानकारी नहीं होती है।

सनातन धर्म में भगवान के लिए तुलसी तोड़ना भी पूजा से जुड़ा ही एक कार्य है, जिसे सही विधि, नियम, मंत्र, पवित्रता, श्रद्धा और पूरी तरह से उचित आचरण के साथ करना जरूरी है।

सनातन धर्म में तुलसी का महत्व

सनातन धर्म के अत्यंत पवित्र पुराण पद्मपुराण के सृष्टिखंड अध्याय 61 में वर्णित श्री तुलसी स्तोत्रम् में तुलसी के महत्व को बताते हुए एक श्लोक कहा गया है कि,

तुलसीं ये विचिन्वन्ति धन्यास्ते करपल्लवाः।

स्कंद और पद्मपुराण में उन हाथों की महिमा के बारे में बताया गया है जो भगवान की पूजा के लिए तुलसी का चयन करते हैं। धन्य हैं वे कोमल हाथ जो तुलसी चुनते हैं।

तुलसी तोड़ने की विधि (Method of Plucking)

ईश्वर के लिए तुलसी दल का चयन करते हुए तुलसी का एक-एक पत्ता न तोड़कर पत्तियों के साथ अग्रभाग को तोड़ना चाहिए। तुलसी की मंजरी सब फूलों से बढ़कर मानी जाती है।

मंजरी तोड़ते समय उसमें पत्तियों का रहना बेहद जरूरी है। मंत्र पढ़कर पुण्य भवा से पौधे को हिलाये बिना तुलसी के अग्रभाग को तोड़ें। इसे पूजा का फल लाख गुना बढ़कर मिलता है।

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तुलसी दल तोड़ने का मंत्र

तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिया। चिनोमि केशवस्यार्थे वरदा भव शोभने ॥ त्वदङ्गसम्भवैः पत्रैः पूजयामि यथा हरिम्। तथा कुरु पवित्राङ्गि कलौ मलविनाशिनि॥

अर्थात्- हे तुलसी, तुम अमृत से पैदा हुई हो और केशव को हमेशा प्रिय हो। मैं तुम्हें केशव के लिए तोड़ता हू। हे तेजस्वी, अपना वरदान दो।

तुम्हारे शरीर से उत्पन्न हुए पत्तों से मैं भगवान हरि की पूजा करता हूं। हे शुद्ध अंगों वाली कलियुग में अशुद्धियों को खत्म करने वाली इस पूजा को सफल बनाओ।

इन समय में तुलसी दल तोड़ने से बचें

इन वारों एवं तिथियों पर तुलसीदल तोड़ने से बचना चाहिए।

  • वैधृति एवं व्यतीपात योग
  • मंगलवार, शुक्रवार, रविवार
  • द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा
  • संक्रांति
  • रात एवं दोनों संध्याओं में
  • जननाशौच (जन्म का सूतक) और मरणाशौच (मृत्यु का पातक)

सनातन धर्म में तुलसी के बिना भगवान की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है। ऐसे में निषिद्ध समय में तुलसीवृक्ष से खुद से गिरी हुए पत्तियों से पूजा करें या फिर निषिद्ध दिनों से एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर उसे पवित्र स्थान पर रखें। इस तरह से आप ईश्वर की पूजा निषिद्ध दिनों में भी कर सकते हैं।

वहीं शालग्रामजी की पूजा के लिए निषिद्ध तिथियों में भी तुलसी तोड़ी जा सकती है। बिना नहाए और जूते पहनकर तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।