घर में सुख-शांति के लिए रोज कैसे करें पूजा? यहां पढ़ें आसान स्टेप-बाय-स्टेप सही तरीका
हिंदू धर्म में दैनिक पूजा का विशेष महत्व है, जो घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाती है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों ने घर पर पूजा करने का सही और क्रम ...और पढ़ें

घर में पूजा करने की सही विधि

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा करने की परंपरा अत्यंत शुभ मानी जाती है। हिंदू परंपरा को मानने वाले लोग रोजाना सुबह और शाम को पूजा करते हैं, ताकि घर में शांति, सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा का वातावरण बना रहे।
घर में रहने वाला प्रत्येक सदस्य बड़ा हो या छोटा भगवान की पूजा-उपासना अपने तरीके से करते हैं। कुछ लोगों को पूजा करने की सही विधि के बारे में पता होता है, जबकि अधिकतर लोग जल्दबाजी और सही ज्ञान न होने के कारण पूजा तो करते हैं, लेकिन क्रमबद्ध तरीके से नहीं करते हैं।
सनातन धर्म में पूजा जीवन का अहम हिस्सा
सनातन धर्म में दैनिक पूजा दिनचर्या का अहम हिस्सा माना गया है। कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत भगवान की पूजा-अर्चना से करता है, उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होने के साथ ईश्वरीय कृपा भी बनी रहती है। आइए जानते हैं एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से पूजा करने का सही और स्टेप बाय स्टेप तरीका क्या है?
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, घर के मंदिर में रोजाना विधि-विधान से पूजा करने से घर में शांति और मां लक्ष्मी का वास होता है। शास्त्रों के अनुसार पूजा की एक निश्चित प्रक्रिया होती है। जिसका पालन हर किसी को करना चाहिए।
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शास्त्रों के अनुसार घर में पूजन की प्रक्रिया नीचे दी गई है-
पूर्व तैयारी और स्वच्छता
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। पूजा स्थल को साफ करें और पूजा की सामग्री (जल, दीप, धूप, रोली, अक्षत, फूल) एक स्थान पर रख लें।
दीप प्रज्वलन और आचमन
सबसे पहले घी या तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद स्वयं की शुद्धि के लिए तीन बार जल से आचमन करें और "ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः" कहें।
गणेश पूजन और संकल्प
किसी भी पूजा में प्रथम पूज्य श्री गणेश जी का ध्यान करें। हाथ में जल और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें।
देवों का स्नान और तिलक
ईश्वर की प्रतिमा या शिवलिंग को जल/गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात रोली, चंदन, अक्षत और वस्त्र/मौली अर्पित करें।
भोग और आरती
ईश्वर को धूप-दीप दिखाएं, फल या मिठाई का भोग लगाएं। आखिर में पूरे श्रद्धा-भाव से आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना बोलकर पूजा का समापन करें।
दिशा और आसन
पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही करनी चाहिए और बैठने के लिए आसन का प्रयोग अनिवार्य है।
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