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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jyeshtha Month 2025: ज्येष्ठ माह में रोजाना करें इस चालीसा का पाठ, जीवन में कभी नहीं सताएगा कोई डर

    Updated: Tue, 13 May 2025 01:36 PM (GMT+05:30)

    वैदिक पंचांग के अनुसार आज यानी 13 मई से ज्येष्ठ माह (Jyeshtha Month 2025) की शुरुआत हो गई है। इस माह में जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की ...और पढ़ें

    तुलसी चालीसा के पाठ से मिलते हैं कई आध्यात्मिक लाभ
    तुलसी चालीसा के पाठ से मिलते हैं कई आध्यात्मिक लाभ

    HighLights

    1. तुलसी पूजा का विशेष महत्व है।
    2. ज्येष्ठ में माह तुलसी पूजा जरूर करनी चाहिए।
    3. पूजा के दौरान तुलसी चालीसा का पाठ करें।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन शास्त्रों में तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ के महीने में तुलसी की पूजा रोजाना करनी चाहिए। साथ ही देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। इस दौरान तुलसी चालीसा का पाठ जरूर करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोजाना तुलसी की पूजा और तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) का पाठ करने से साधक को आर्थिक तंगी की समस्या से छुटकारा मिलता है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। आइए पढ़ते हैं तुलसी चालीसा।

    तुलसी चालीसा के पाठ से मिलते हैं ये आध्यात्मिक लाभ

    • ज्येष्ठ के महीने रोजाना तुलसी चालीसा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
    • आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है।
    • मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा बनी रहती है।
    • धन लाभ के योग बनते हैं।
    • नजर दोष से छुटकारा मिलता है।

    ।।तुलसी चालीसा का पाठ।। (Tulsi Chalisa Ka Path)

    श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।

    जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

    नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।

    दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।

    विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।

    भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।

    जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।

    करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।

    कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।

    (Pic Credit- Freepik)

    तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।

    कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।

    वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।

    श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।

    कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।

    छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।

    तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।

    औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,

    देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।

    वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।

    नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।

    नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।

    नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।

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    नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।

    नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।

    नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।

    जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।

    निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।

    करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।

    शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।

    क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।

    मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।

    जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।

    बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।

    प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।

    चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।

    करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।

    पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।

    यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।

    करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।

    है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

    तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।

    भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।

    यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।

    गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

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