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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी के दिन इस स्तुति का करें पाठ, विवाह में आ रही बाधा होगी दूर

    Updated: Sat, 07 Sep 2024 09:11 AM (IST)

    गणेश चतुर्थी के पर्व का विशेष महत्व है। इस शुभ अवसर पर गणपति बप्पा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही जीवन के दुखों को करने के लिए व्रत भी क ...और पढ़ें

    Lord Ganesh: ऐसे करें गणेश जी को प्रसन्न
    Lord Ganesh: ऐसे करें गणेश जी को प्रसन्न

    HighLights

    1. हर साल गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।
    2. गणेश उत्सव देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है।
    3. इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा होती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी आज यानी 07 सितंबर (Kab Hai Ganesh Chaturthi 2024) को मनाई जा रही है। यह पर्व भगवान शिव के पुत्र गणपति बप्पा को समर्पित है। ऐसे में आप गणेश चतुर्थी के दिन पूजा के समय गणेश स्तुति के पाठ के द्वारा जीवन में सभी कार्यों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। मान्यता है कि इसका पाठ करने से शादी में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं। आइए पढ़ते हैं गणेश स्तुति।

    गणेश स्तुति का पाठ

    मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरञ्जकम्।

    अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ।।

    नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जकं नताधिकापदुद्धरम् ।

    सुरेश्वरमं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ।।

    समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरं दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।

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    कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं नमस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ।।

    अकिंचनार्तिमार्जनं चिरंतनोक्तिभाजनं पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।

    प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणं कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ।।

    नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजमचिन्त्यरुपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम्।

    हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि संततम् ।।

    महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं प्रगायति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।

    अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतां समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ।।

    मंगलमुर्ती मोरया।।

    श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि

    गणेश जी के मंत्र

    ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

    गणेश गायत्री मंत्र

    ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

    ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

    ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

    सिद्धि प्राप्ति हेतु मंत्र

    श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

    शुभ लाभ गणेश मंत्र

    ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

    भगवान गणेश के मंत्र

    'गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।

    नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।

    धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।

    गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

    धन लाभ हेतु मंत्र

    ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

    संकट नाशक मंत्र

    गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।

    द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥

    विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।

    द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌ ॥

    विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌ ।

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