यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 24, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Shani Jayanti 2025: जीवन में चाहते हैं शुभ परिणाम, तो शनि जयंती के दिन करें इन मंत्रों का जप
हर साल ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर शनि जयंती का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना होती है। सा ...और पढ़ें

HighLights
- ज्येष्ठ माह में शनि जयंती मनाई जाती है।
- इस दिन शनिदेव का अवतरण हुआ था।
- इस दिन शनिदेव के मंत्रों का जप करना चाहिए।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार शनि जयंती का पर्व 27 मई (Shani Jayanti 2025 Date)को मनाया जाएगा। इस शुभ अवसर पर शनिदेव की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विशेष चीजों का दान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि शनिदेव के पूजा में मंत्रों का जप न करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है। इसलिए शनिदेव के मंत्रों का जप जरूर करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंत्रों का जप करने से शनि दोष दूर होता है। साथ ही जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं।
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भगवान शनिदेव के मंत्र
सफल जीवन के लिए मंत्र
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।
गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च।
आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।
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शनिदेव का वैदिक मंत्र
ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम ।
उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात ।
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।
ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।
शनि गायत्री मंत्र
ओम भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्
शनि आह्वान मंत्र
नीलाम्बरः शूलधरः किरीटी गृध्रस्थित स्त्रस्करो धनुष्टमान् |
चतुर्भुजः सूर्य सुतः प्रशान्तः सदास्तु मह्यां वरदोल्पगामी ||
शनि आरोग्य मंत्र
ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा।
कंकटी कलही चाउथ तुरंगी महिषी अजा।।
शनैर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्।
दुःखानि नाश्येन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखमं।।
शनि देव का महामंत्र
ओम निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
शनि का पौराणिक मंत्र
ऊँ श्रां श्रीं श्रूं शनैश्चाराय नमः।
ऊँ हलृशं शनिदेवाय नमः।
ऊँ एं हलृ श्रीं शनैश्चाराय नमः।
ऊँ मन्दाय नमः।।
ऊँ सूर्य पुत्राय नमः।।
।।शनि देव की आरती।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव....
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव....
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव....
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव....
जय जय श्री शनि देव....
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
जय जय श्री शनि देव....
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