Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी के दिन करें तुलसी चालीसा का पाठ, खुशियों से भर जाएगा जीवन
धार्मिक मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi 2026) के अवसर पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं ...और पढ़ें
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Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी के दिन कैसे पाएं मां लक्ष्मी की कृपा (Image Source: AI-Generated)
HighLights
एकादशी तिथि को शुभ माना जाता है
इस दिन व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है
तुलसी चालीसा का पाठ करना चाहिए
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी व्रत किया जाता है। इस बार षटतिला एकादशी व्रत 14 जनवरी (Shattila Ekadashi 2026 Date) को किया जाएगा। इस व्रत को सभी पापों से मुक्ति पाने के लिए व्रत किया जाता है। इस दिन श्रीहरि और तुलसी पूजन करने का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन सच्चे मन से तुलसी चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा से धन लाभ के योग बनते हैं। ऐसे में आइए पढ़ते हैं तुलसी चालीसा।
तुलसी चालीसा से मिलते हैं ये लाभ
- धन की प्राप्ति होती है।
- घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।
- सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
- सभी दुख दूर होते है।
- शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
।।दोहा तुलसी चालीसा।।
श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।
नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।
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