सुहागिनों का खास पर्व कजरी तीज: देवी मां को प्रसन्न करने के लिए करें नीम के पेड़ की पूजा
कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती के साथ नीम के पेड़ की पूजा करती हैं। यह ...और पढ़ें
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कजरी तीज के मौके पर नीम पूजन का महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर भारत की महिलाओं के बीच तीज का त्योहार खासतौर से मनाया जाता है। तीज को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं और सुहागिन महिलाएं इस पर्व की तैयारी कई दिनों पहले से ही करने लगती हैं। हरियाली और हरतालिका की ही तरह कजरी तीज में भी महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करती हैं।
हिंदू शास्त्रों में कजरी तीज को शिव और शक्ति के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। हिंदू परंपराओं के मुताबिक कजरी तीज के मौके पर कौन-से पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है?
कजरी तीज 2026
इस साल कजरी तीज की तिथि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की 31 अगस्त 2026, सोमवार के दिन पड़ रही है। भले ही यह तीज श्रावण मास में न आती हो, लेकिन सावन-सा रिमझिम वातावरण जरूर देखने को मिलता है।
महिलाएं इस मौके पर हरी साड़ी, हरी चूड़ियां पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के सामने हाथ जोड़कर पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। इस मौके पर नीमड़ी पूजन का भी विशेष महत्व है।

कजरी तीज पर नीमड़ी पूजन क्या है?
कजरी तीज के मौके पर नीमड़ी पूजन का खास महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं नीम के पेड़ को देवी मां के रूप में पूजती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। हिंदू धर्म के अलावा वैज्ञानिक नजरिए से भी नीम का पेड़ प्राकृतिक के लिए बेहद लाभकारी और योग्य है।
नीम के पेड़ की पूजा करने से न सिर्फ वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा भी मिलती है। कजरी तीज के मौके पर महिलाएं नीम के पेड़ की पूजा करने के साथ उन्हें नैवेद्य अर्पित करती हैं। कुछ स्थानों पर नीम की पत्तियों के ऊपर मिट्टी से निर्मित देवी की प्रतिमा रखकर पूजा अर्चना की जाती है। इसके अलावा महिलाएं सुहाग से जुड़ी सामग्री अर्पित करती हैं।
कजरी तीज पर नीम की पूजा करने के पीछे की मान्यता यह है कि, इस दिन नीम के पेड़ में मां का वास होता है, जिन्हें पूजने से वैवाहिक जीवन में सुखद और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में कजरी तीज के दिन नीम के पेड़ की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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