कजरी तीज की आरती में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत का फल
कजरी तीज के व्रत में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए पूजा ...और पढ़ें

कजरी तीज की आरती के नियम (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कजरी तीज का पर्व अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने और विवाह में आ रही बाधा को दूर करने के लिए विधिपूर्वक व्रत रखती हैं। कजरी तीज को कजली या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है।
इस अवसर पर नीमड़ी माता, भगवान शिव-पार्वती और चंद्र देव पूजा करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, पूजा के दौरान कुछ गलतियों को करने से व्रत सफल नहीं होता है और अशुभ फल प्राप्त होता है। इसलिए पूजा के दौरान नियम का पालन जरूर करना चाहिए। पूजा और आरती का पूरा फल तभी मिलता है जब इसे सही नियमों के साथ किया जाए। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कजरी तीज की आरती के दौरान किन गलतियों को करने से बचना चाहिए।
आरती की थाली में रखें ये चीजें
आरती की थाली तांबे, पीतल या चांदी की होनी चाहिए। लोहे या प्लास्टिक की थाली से आरती भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
थाली में दीपक, कुमकुम, अक्षत, ताजे फूल, धूप और कपूर शामिल करने चाहिए।
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आरती के नियम
- कजरी तीज की पूजा से पहले स्नान करें। इसके बाद मंदिर में गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।
- आरती के दौरान सिर जरूर ढकना चाहिए।
- दीपक को किसी दूसरे दीपक से भूलकर भी न जलाएं। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है।
- अगर दीपक टूटा या चटका है, तो उससे आरती न करें। टूटा या चटका दीपक को पवित्र नदी में बहा देना चाहिए।
- आरती करते समय नीमड़ी माता और शिव-पार्वती का ध्यान करें। मन में किसी बारे कुछ गलत न सोचें।
- इसके अलावा पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े धारण न करें, क्योंकि काले रंग के कपड़े पहनने से नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है।
- एक बात का ध्यान रखें कि आरती हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में ही घुमानी चाहिए।
- आरती के दौरान नीमड़ी माता, भगवान शिव-पार्वती के संपूर्ण स्वरूप के सामने दीपक को 3, 5, या 7 बार घुमा सकते हैं।
कब है कजरी तीज 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को किया जाएगा।
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत- 30 अगस्त को सुबह 09 बजकर 36 मिनट पर
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का समापन- 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
