शिवलिंग पर पारिजात चढ़ाने की ये भूल पड़ सकती है भारी, आखिर क्यों बिना धोए ही चढ़ाया जाता है यह दिव्य फूल
पारिजात (हरसिंगार) का पौधा अपनी सुगंध और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, जिसे हरिवंश पुराण में मनोकामना पूरी ...और पढ़ें

शिव जी को पारिजात के फूल कैसे चढ़ाएं (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पारिजात या हरसिंगार का पौधा अपनी बेहतरीन सुगंध और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, इस पौधे को स्वर्ग से धरती पर लाया गया था।
यह बात हममें से अधिकतर लोगों को पता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरिवंश पुराण में इसे मनोकामना को पूरी करने वाला वृक्ष बताया गया है। पारिजात के फूल सूर्य की रोशनी की बजाय आधी रात को चांद की रोशनी में खिलते हैं और सुबह तक झड़ जाते हैं।
पारिजात के फूल अर्पित करने से जुड़े नियम
पारिजात का फूल भगवान शिव को प्रिय है। भक्तों का मानना है कि, महादेव को महादेव को पारिजात का फूल अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होने के साथ पूजा भी फलित होती है।
हालांकि इसके फूल को शिवलिंग पर चढ़ाने के कुछ नियम बताए गए हैं। माना जाता है कि, पारिजात का पौधा कभी भी तोड़कर पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव की पूजा निष्फल हो सकती है।
पारिजात का फूल इकलौता ऐसा पुष्प है, जिसे सीधा जमीन से उठाकर भगवान को चढ़ाया जाता है। इसके अलावा इसे धोने की भी जरूरत नहीं होती, क्योंकि शास्त्रों में इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। इस विधि से पारिजात का फूल अर्पित करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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पारिजात पौधे का वास्तु महत्व
पारिजात पौधे को अक्सर सिर्फ सजावटी पौधा माना जाता है, जबकि यह भारतीय पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक प्रथाओं में गहराई से समाई हुई है। हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, पारिजात का पौधा समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था।
इसे दिव्य फूल भी माना जाता है। ऐसा भी बताया जाता है कि, भगवान कृष्ण इसे अपनी सबसे प्रिय रुक्मिणी के लिए पृथ्वी पर लेकर आए थे। हिंदू पूजा, मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठान में इसके फूल देवताओं को अर्पित किए जाते हैं, जो शुद्धता, प्रेम और आध्यात्मिक भक्ति का प्रतीक हैं।
औषधीय गुणों से भी भरपूर पारिजात का पौधा
आध्यात्मिक नजरिए के साथ-साथ पारिजात का पौधा औषधीय रूप से भी बेहद खास माना जाता है। इस पौधे का तना, पत्तियां, फूल, छाल और बीज सभी चीजें सेहत के लिहाज से लाभदायक मानी जाती हैं। इस पौधे से सुगंधित इत्र भी बनाए जाते हैं।
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