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    Pradosh Vrat 2026: महादेव की पूजा के समय जपें ये सिद्ध मंत्र, सफलता चूमेंगी आपके कदम

    Updated: Mon, 09 Feb 2026 11:30 PM (IST)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 फरवरी को शनि प्रदोष व्रत है। शनिवार को पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशे ...और पढ़ें

    Pradosh Vrat 2026: महादेव को कैसे प्रसन्न करें?

    Pradosh Vrat 2026: महादेव को कैसे प्रसन्न करें?

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, शनिवार 14 फरवरी को प्रदोष व्रत है। शनिवार के दिन पड़ने के चलते यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से निंसतान दंपती को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। वहीं, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस शुभ अवसर पर शिव मंदिरों में भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।

    Bhagwan Shiv

    ज्योतिषियों की मानें तो शनि प्रदोष व्रत पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। अगर आप भी देवों के देव महादेव की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो शनि प्रदोष व्रत पर पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें।

    शिव मंत्र

    1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    2. करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं ।

    विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥

    3. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

    4. ऊँ अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो, घोर घोर तरेभ्यः। सर्वेभ्यो सर्व शर्वेभ्यो, नमस्ते अस्तु रूद्ररूपेभ्यः।।

    5. नमामिशमीशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं।।

    6. निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाश माकाश वासं भजेऽहं।।

    7. ऊँ क्लीं क्लीं क्लीं वृषभारूढ़ाय वामांगे गौरी कृताय क्लीं क्लीं क्लीं ऊँ नमः शिवाय।।

    8. ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

    शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

    9. सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।

    उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥

    परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।

    सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥

    वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।

    हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

    एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।

    10. ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।