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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 15, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Shardiya Navratri 2023: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, पूरी होगी मनचाही मुराद

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Sun, 15 Oct 2023 08:00 AM (IST)

    इस वर्ष 15 अक्टूबर से लेकर 23 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्रि है। इसके अगले दिन दशहरा है। नवरात्रि के प्रथम दिन पर जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की प्रथम शक ...और पढ़ें

    Shardiya Navratri 2023: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, पूरी होगी मनचाही मुराद
    Shardiya Navratri 2023: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, पूरी होगी मनचाही मुराद

    HighLights

    1. इस वर्ष 15 अक्टूबर से लेकर 23 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्रि है।
    2. नवरात्रि के प्रथम दिन पर मां दुर्गा की प्रथम शक्ति मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
    3. मां शैलपुत्री की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली | Shardiya Navratri 2023: सनातन धर्म में हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष 15 अक्टूबर से लेकर 23 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्रि है। इसके अगले दिन दशहरा है। नवरात्रि के प्रथम दिन पर जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की प्रथम शक्ति मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त साधक व्रत उपवास भी रखते हैं। धार्मिक मत है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही आय, सौभाग्य और आयु में वृद्धि होती है। इसके अलावा, जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं। अगर आप भी दुख और संताप से निजात पाना चाहते हैं, तो आज पूजा के समय इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ करें।

    माँ शैलपुत्री देवी स्तोत्र

    वंदे वांच्छितलाभायाचंद्रार्धकृतशेखराम्।

    वृषारूढांशूलधरांशैलपुत्रीयशस्विनीम्॥

    पूणेंदुनिभांगौरी मूलाधार स्थितांप्रथम दुर्गा त्रिनेत्रा।

    पटांबरपरिधानांरत्नकिरीटांनानालंकारभूषिता॥

    प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांतकपोलांतुंग कुचाम्।

    कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीक्षीणमध्यांनितंबनीम्॥

    स्तोत्र

    प्रथम दुर्गा त्वहिभवसागर तारणीम्।

    धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्रीप्रणमाभ्यहम्॥

    त्रिलोकजननींत्वंहिपरमानंद प्रदीयनाम्।

    सौभाग्यारोग्यदायनीशैलपुत्रीप्रणमाभ्यहम्॥

    चराचरेश्वरीत्वंहिमहामोह विनाशिन।

    भुक्ति, मुक्ति दायनी,शैलपुत्रीप्रणमाभ्यहम्॥

    चराचरेश्वरीत्वंहिमहामोह विनाशिन।

    भुक्ति, मुक्ति दायिनी शैलपुत्रीप्रणमाभ्यहम् ॥

    माता शैलपुत्री देवी कवच

    ॐकारः में शिरः पातु मूलाधार निवासिनी।

    हींकारः पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥

    श्रींकार पातु वदने लावण्या महेश्वरी।

    हुंकार पातु हृदयम् तारिणी शक्ति स्वघृत।

    फट्कार पातु सर्वाङ्गे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

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    माता शैलपुत्री की स्तुति

    जय माँ शैलपुत्री प्रथम, दक्ष की हो संतान।

    नवरात्री के पहले दिन, करे आपका ध्यान॥

    अग्नि कुण्ड में जा कूदी, पति का हुआ अपमान।

    अगले जनम में पा लिया, शिव के पास स्थान॥

    जय माँ शैलपुत्री, जय माँ शैलपुत्री॥

    राजा हिमाचल से मिला, पुत्री बन सम्मान।

    उमा नाम से पा लिया, देवों का वरदान॥

    सजा है दाये हाथ में, संहारक त्रिशूल।

    बाए हाथ में ले लिया, खिला कमल का फूल॥

    जय माँ शैलपुत्री, जय माँ शैलपुत्री॥

    बैल है वाहन आपका, जपती हो शिव नाम।

    दर्शन से आनंद मिले, अम्बे तुम्हे प्रणाम॥

    नवरात्रों की माँ, कृपा कर दो माँ।

    जय माँ शैलपुत्री, जय माँ शैलपुत्री॥

    जय माँ शैलपुत्री प्रथम, दक्ष की हो संतान।

    नवरात्री के पहले दिन, करे आपका ध्यान॥

    डिसक्लेमर-'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। '