कुश, ऊन या रेशम? जानें पूजा के लिए कौन-सा आसन सर्वश्रेष्ठ और क्यों जरूरी है सही शारीरिक मुद्रा
हिंदू धर्म में पूजा के दौरान सही आसन और मुद्रा का महत्व बताया गया है, जो केवल मंत्रोच्चार से कहीं अधिक है। जानिए पूजा के दौरान कैसे बैठे और किस तरह के ...और पढ़ें

पूजा का सही आसन और बैठने की मुद्रा? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा सिर्फ भगवान के मंत्रोच्चार और भक्ति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूजा के दौरान सही आसन प बैठना भी बेहद जरूरी माना जाता है, जिसे बहुत से हिंदू लोग नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु और हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, पूजा के दौरान बैठने के सही तरीके से लेकर आसन तक व्यक्ति की ऊर्जा, एकाग्रता और पूजा के फल पर असर दिखाता है।
ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं और गलत आसन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पूजा का प्रभाव कम हो जाता है? आइए जानते हैं पूजा के दौरान सही आसन और बैठने का तरीका क्या होना चाहिए?
पूजा के दौरान रखें इन बातों का खास ध्यान?
घर या मंदिर में पूजा के दौरान हमेशा सुखासन (पालथी मारकर बैठें), पद्मासन या वज्रासन की मुद्रा में बैठना चाहिए। इस दौरान आपकी कमर सीधी होने के साथ सिर ऊपर की होना सही माना जाता है।

पूजा के लिए कौन-सा आसन बेस्ट?
कुशसन (कुश घास का बना आसन)
शास्त्रों में पूजा करने के लिए कुश का आसन सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। कुश घास को पवित्र माना जाता है और यह नेगेटिव एनर्जी को दूर करने में मदद करता है।
ऊन की चटाई
ऊन की चटाई शरीर को गर्मी प्रदान करती है। सर्दियों में भगवान की पूजा के लिए ऊन से बना आसन सबसे सर्वोत्तम है।
रेशम या सूती का आसन
रेशम की वेदी को देवी लक्ष्मी से जोड़ा जाता है, जिस वजह पूजा के दौरान रेशम से बने आसन का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। साधारण संध्या पूजा-अर्चना के लिए सूती का आसन शुभ है।
खबरें और भी
कालीन या प्लास्टिक की चटाई
पूजा के दौरान कालीन या प्लास्टिक की चटाई ऊर्जा में बाधा का कारण बन सकती है और शास्त्रों में इसे अनुचित माना जाता है।
पूजा के दौरान सही शारीरिक मुद्रा क्यों जरूरी?
पूजा के दौरान शरीर की सही मुद्रा ध्यान भटकने से रोकने के साथ ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करती है। यह एकाग्रता को बढ़ाने के साथ मन आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त है।
गलत मुद्रा में पूजा करने के नुकसान
जो भी व्यक्ति गलत मुद्रा में भगवान की पूजा-अर्चना करता है, उसका ध्यान भटकने के साथ ऊर्जा का प्रवाह भी असंतुलित हो सकता है। इसके अलावा पूजा के दौरान आसन साफ होने चाहिए। पूजा पूर्ण होने के बाद इसे व्यवस्थित रूप से सुरक्षित स्थान पर रख दें। एक ही मैट का बार-बार इस्तेमाल करना चाहिए।
पूजा सिर्फ मंत्रों और भक्ति पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि सही आसन भी मायने रखता है। इसलिए अगली बार पूजा करते वक्त कुश, ऊन या रेशम का आसन इस्तेमाल करें।
यह भी पढ़ें- गृह प्रवेश में क्यों उबाला जाता है दूध? जानें इस परंपरा के पीछे का धार्मिक महत्व
यह भी पढ़ें- हिंदू विवाह में दूल्हा दुल्हन की मांग में 3 बार सिंदूर क्यों भरता है, जानें धार्मिक कारण?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।