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    गृह प्रवेश में क्यों उबाला जाता है दूध? जानें इस परंपरा के पीछे का धार्मिक महत्व

    Updated: Wed, 27 May 2026 06:30 PM (GMT+05:30)

    गृह प्रवेश के दौरान नए घर में दूध उबालने की परंपरा सदियों से निभाई जाती है, जिसे समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। ...और पढ़ें

    गृह प्रवेश में दूध उबालने की परंपरा (Picture Credit AI- Generated Image)

    गृह प्रवेश में दूध उबालने की परंपरा (Picture Credit AI- Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नया घर बनाना और उसमें प्रवेश करना हर किसी के लिए यह पल जिंदगी का सबसे यादगार लम्हा होता है। भारत में पहली बार नए घर में प्रवेश करने से जुड़ी रस्मों को सदियों से निभाई जाती रही हैं। इन्हीं में सबसे खास और पहली रस्म होती है दूध उबालने की रस्म।

    जब घर के सदस्य पहली बार नए घर में प्रवेश करते हैं, तो सबसे पहले किचन में दूध उबालने की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि, यह परंपरा क्यों निभाई जाती है और इसके पीछे क्या मान्यताएं जुड़ी हैं?

    दूध उबालने की रस्म समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी

    घर का सबसे अहम हिस्सा किचन होता है और इसी स्थान से पूरे घर में ऊर्जा का संचार होता है। हिंदू धर्म में दूध को पवित्रता, शुद्ध और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में दूध का संबंध चंद्रमा ग्रह से बताया जाता है, जो मन और माता दोनों का कारक है।

    मान्यताओं के मुताबिक नए घर में दूध उबालने से वहां सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती हैं, जो घर के सदस्यों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने का काम करती है।

    भारतीय परंपराओं में नए घर में प्रवेश करने के साथ ही पहला कार्य रसोईघर को जाग्रत करना होता है। कुछ मान्यताओं में तो यहां तक कहा गया है कि, दूध उबालने से मां अन्नपूर्णा और गृहलक्ष्मी को आमंत्रित किया जाता है। 

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    गृह प्रवेश में दूध उबालने का असल कारण

    हिंदू धर्म में दूध केवल भोजन नहीं, बल्कि पोषण, देखभाल और जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। भारतीय गृह जीवन में किचन महत्वपूर्ण स्थान इसलिए है क्योंकि यहीं पर अग्नि, जल, भोजन और मानवीय प्रयास रोजाना एक साथ आते हैं। गृह प्रवेश के दौरान दूध उबालना कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक घरेलू संकेत है।

    धार्मिक शास्त्रों में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि, दूध को न उबालने से नुकसान हो सकता है, बल्कि यह लोकमान्यता पर आधारित रस्में हैं।

    गृह प्रवेश के दौरान दूध उबालने की रस्म के दौरान इन बातों का आवश्यक रूप से ध्यान रखें कि, नए किचन में दूध उबालने के लिए स्टील के नए बर्तन का ही इस्तेमाल करें। कोशिश करें कि इस रस्म को घर की किसी महिला द्वारा ही निभाई जाए। जब दूध उबाल जाए तो उसमें चावल डालकर खीर बना लें और भगवान को अर्पित करने के बाद सभी भी बांट दें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।