Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पहाड़ों पर स्थित 5 प्राचीन मंदिर: जहां सड़कें नहीं पहुंचतीं, सिर्फ आस्था ले जाती है

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 01:20 PM (IST)

    भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जो पहाड़ों की चोटियों पर स्थित हैं, जहां तक सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है। इन मंदिरों में भक्तों को कठिन यात्रा क ...और पढ़ें

    पहाड़ों पर स्थित हैं 5 प्राचीन मंदिर (Picture Credits- AI Image)

    पहाड़ों पर स्थित हैं 5 प्राचीन मंदिर (Picture Credits- AI Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत जिसे मंदिरों का देश भी कहा जाता है, जहां की पहाड़ों की चोटियों पर ऐसे कई मंदिर स्थित हैं, जो न तो पूरी तरह सड़कों से घिरे हैं न ही इंजनों के शोर से जो इस बात का प्रतीक है कि, कुछ यात्रा जितनी मुश्किल होती है, उतनी ही सुखद भरी भी।

    पहाड़ों पर बसे इन मंदिरों में जाने के लिए कोशिशें, धैर्य और ऐसे रास्ते पर चलने की इच्छा शक्ति की जरूरत होती है, जहां दूसरे नहीं चलते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही पहाड़ों पर स्थित 5 मंदिरों के बारे में, जिनका महत्व आज भी उतना ही है, जितना कि, प्राचीन समय में था।

    केदारनाथ

    उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है पवित्र केदारनाथ मंदिर, जो मानो आकाश को अपनी बाों में थामे हुए दिखाई देता है। यहां तक आने के लिए कोई सड़क नहीं है। तीर्थयात्री मुश्किल रास्तों पर, कड़ाके की ठंड में बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस लंबी यात्रा को पूरा करने के लिए जल्दबाजी नहीं बल्कि धैर्य रखना जरूरी है।

    वैष्णो देवी

    जम्मू और कश्मीर के कटरा में स्थित मां वैष्णो का धाम त्रिकूट पर्वत पर बसा है, जो समुद्र तल से करीब 5,200 फीट ऊंचा है। एक मुश्किल चढ़ाई जो हृदय की तीर्थयात्रा को दर्शाती है। भक्तों के द्वारा उठाया गया हर कदम उनकी तीव्र इच्छा की इलक है। यहां भी सड़कें वैष्णो देवी तक नहीं पहुंच सकतीं। यहां आने वाले भक्त पूरे इरादे और प्रयास के साथ आते हैं, ताकि माता रानी के दर्शन प्राप्त कर सके।

    खबरें और भी

    तुंगनाथ

    दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, तुंगनाथ मंदिर बादलों की गोद में बसा है। यहां शांति का मतलब आवाज की कमी नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अनुभव करना है। यह मंदिर सिखाता है कि, चाहे कितने तूफान आ जाए या हवाएं गरज लें कभी भी अविचलित नहीं होना चाहिए। तुंगनाथ की चढ़ाई भी काफी मुश्किल है, क्योंकि यहां आने के लिए भक्तों को काफी टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।

    मध्यमहेश्व

    हिमालय की गहराई में स्थित मध्यमहेश्वर मंदिर एक संकरी घाटी में बसा है। यहां तक न आने के लिए कोई सड़क नहीं है, और यही बात इसकी सबसे बड़ी खासियत है। मंदिर की ही तरह भक्ति के लिए भी दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। जीवन में जो चीजें मायने रखती है, उसे आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता है। उनके लिए समर्पण, संवेदनशीलता और कभी-कभी एकाकी यात्रा की जरूरत होती है।

    आदि बद्री

    आदि बद्री मंदिर सरस्वती नदी के उद्गम स्थल के किनारे में बसा है। इस मंदिर तक भी पहुंचने के लिए आपको काफी चलना पड़ता है, क्योंकि सड़कें वहां तक भी नहीं पहुंच सकतीं। यह यात्रा सधी हुई है। ये मंदिर जहां सड़कों से नहीं पहुंचा जा सकता है, मात्र भौतिक चमत्कार नहीं हैं, बल्कि ये हमारे अंदर के उन अनुभवों का प्रतीक हैं जिनसे हम गुजरते हैं।

    यह भी पढ़ें- रामायण काल से जुड़ा है कानपुर के 'तपेश्‍वरी देवी मंदिर' का नाम, माता सीता ने यहां किए थे ये काम

    यह भी पढ़ें- भारत के अनोखे मंदिर, जहां मिठाई या फल नहीं बल्कि प्रसाद में मिलते हैं 'नोट और सिक्के'

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।