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    भारत के अनोखे मंदिर, जहां मिठाई या फल नहीं बल्कि प्रसाद में मिलते हैं 'नोट और सिक्के'

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 11:44 AM (IST)

    भारत में कुछ ऐसे अनोखे मंदिर हैं जहां भक्तों को प्रसाद के रूप में मिठाई या फल नहीं, बल्कि करेंसी नोट और सिक्के दिए जाते हैं। ...और पढ़ें

    भारत के इन मंदिरों में प्रसाद के रूप में मिलता है पैसा (Picture Credit- AI Generated)

    भारत के इन मंदिरों में प्रसाद के रूप में मिलता है पैसा (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर जब भी हम किसी मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं, तो हमें प्रसाद स्वरूप लड्डू, मिष्ठान या फल का भोग दिया जाता है। लेकिन हमारे देश में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जहां प्रसाद के रूप में धन का वितरण किया जाता है।

    इन मंदिरों में आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में करेंसी नोट और सिक्के दिए जाते हैं। आइए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में।

    महालक्ष्मी मंदिर, रतलाम

    करुणासामी मंदिर तमिलनाडु

    तमिलनाडु के थेनी जिले के कदमलाईकुंडु के नजदीक एक पहाड़ी क्षेत्र में बसा करुणासामी मंदिर, जहां मुख्य रूप से करुणासामी देवी की पूजा की जाती है। इस मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों का मानना है कि, जो लोग अदालती मामलों, पारिवारिक समस्याओं या व्यक्तिगत परेशानियों का सामना कर रहे हैं, वे यहां आकर प्रार्थना करते हैं, तो उन्हें न्याय मिलता है।

    मंदिर की प्रसिद्ध का एक कारण प्रसाद के रूप में धन का वितरण है। इस मंदिर में आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में नोट दिए जाते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता है  कि, भगवान की इच्छा भक्तों की मुश्किलों को दूर कर, उन्हें आर्थिक मदद प्रदान करना है।

    महालक्ष्मी मंदिर, रतलाम

    महालक्ष्मी मंदिर, रतलाम

    महालक्ष्मी मंदिर रतलाम के मानक चौक में स्थित है। वर्ष भर श्रद्धालुओं की चकाचौंध से भरा रहने वाला यह मंदिर दीवाली के दौरान एक जादुई दुनिया में बदल जाता है।

    धनतेरस से लेकर पांच दिनों तक चलने वाले दीवाली उत्सव के दौरान मंदिर के गर्भगृह को श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए नोटों, सोने के आभूषणों और रत्नों से सजाया जाता है। रतलाम के पूर्व महाराजा रतन सिंह राठौर द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी सालों बाद निभाई जा रही है।

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    दिवाली के दौरान श्रद्धालु देवी के समक्ष अपने पैसे और आभूषण अर्पित करते हैं। मान्यता है कि, ऐसा करने से उनकी संपत्ति दोगुनी हो जाती है। उत्सव खत्म होने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान को उन्हें वापस कर दिया जाता है। इसके अलावा प्रसाद के रूप में उन्हें नोट और सिक्के बांटे जाते हैं।

    त्योहार के दौरान आने वाले भक्तों प्रसाद के रूप में जब सिक्के और गहने मिलते हैं, तो उनके चेहरे पर साफतौर पर खुशी देखी जा सकती है। ये देवी के आशीर्वाद की ऐसी निशानी हैं, जिन्हें अधिकतर लोग आम मंदिरों में मिलने वाली मिठाइयों की तुलना से कहीं अधिक सावधानी और सम्मान के साथ अपने पास रखते हैं।

    लाखों मंदिरों वाले भारत देश में ये दो मंदिर अपनी बनावट या प्राचीन होने की वजह से नहीं, बल्कि यहां मिलने वाले प्रसाद के रूप में धन के लिए प्रसिद्ध है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।