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क्यों शिवजी की शादी में असंतुलित हो गई थी धरती और कैसे बची दुनिया?

Published: Wed, 01 Jul 2026 12:10 PM (IST)

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ी अनोखी बारात का वर्णन है। इस बारात के कारण ...और पढ़ें

शिवजी की बारात में कौन शामिल नहीं हुआ था? (Picture Credit- AI Generated)

शिवजी की बारात में कौन शामिल नहीं हुआ था? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव की शादी से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनके बारे में पढ़ने, सुनने या जानने के बाद काफी हैरानी होती है। शिव से जुड़े कई पुराणों में इस बात का उल्लेख देखने को मिलता है कि, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।

इस खास मौके पर भगवान शिव की बारात जितनी भव्य थी उतनी ही डरावनी भी। इस दिव्य बारात में इतने प्राणी शामिल हुए कि नॉर्थ और साउथ का संतुलन ही बिगड़ गया। इस स्थिति में महादेव ने किसी पृथ्वी के दूसरे छोर पर जाने का आग्रह किया, आइए जानते हैं।

भगवान शिव की बारात में कौन शामिल नहीं हुआ? 

कहते हैं कि, जब भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से हो रहा था, तब ऐसा कोई भी जीव नहीं था, जो शिव जी के बारात में शामिल न हुआ हो। इस दिव्य बारात में बाराती के रूप में, भूत-प्रेत, पिशाच, देव, दैत्य, दानव, गंधर्भ, नाग, किन्नर, यक्ष, ब्रह्मराक्षस, असुर आदि शामिल हुए थे।

भगवान शिव की इस बारात में कोई भस्म लगाए दिख रहा था तो कोई आभूषणों से लिपटा हुए एकदम रूपवान, जिसका जैसे वेश वो वैसी ही नाचते हुए हिमालय पर्वत के राजा हिमवान की पुत्री की शादी में पहुंचा।

पृथ्वी का संतुलन क्यों बिगड़ा?

शिव पुराण के अनुसार, शिव जी के बारात में इतने लोग शामिल हुए थे कि, हिमालय पर अधिक भार पड़ने के कारण उत्तर और दक्षिण का भार असंतुलन होकर पृथ्वी अपनी धुरी से झुक गई थी।

इसके बाद पृथ्वी को संतुलित करने के लिए भगवान शंकर ने महर्षि अगस्त्य मुनि को जंबू द्वीप के सबसे दक्षिणी छोर पर जाने की आग्रह की, और उनके वहां पहुंचते ही पृथ्वी एक फिर से संतुलित हो गई। संपूर्ण ब्रह्मांड एक ओर महर्षि अगस्त्य मुनि एक ओर, क्योंकि वो अकेले नहीं थे, उनके साथ तप का बल था।

शिव भगवान की शादी में अगस्त्य मुनि की भूमिका

परम ज्ञान ही परमेश्वर के बराबर

सनातन धर्म से जुड़े प्रथम वेद (ऋग्वेद) के प्रथम मंडल के ज्यादातर श्लोक अगस्त्य मुनि द्वारा ही लिखे गए हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ा यह रहस्य इस बात का प्रतीक है कि, कैसे परम ज्ञान ही परमेश्वर के समान है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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