शिव के गले से लेकर विष्णु के आसन तक: जानिए भारतीय दर्शन में सांपों का गहरा अर्थ
प्राचीन भारतीय संस्कृति में सांपों के गहरे प्रतीकात्मक अर्थ, जो उन्हें शांति, पुनर्जन्म और आध्यात्मिक जागृति से जोड़ता है। ...और पढ़ें

क्यों हैं सांप भारतीय दर्शन में ज्ञान औ शांति का प्रतीक? (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कभी सोचा है आपने प्राचीन काल में गुरुओं ने शांति क परम अवस्था को दर्शाने के लिए एक जहरीले और डरावने सांप को ही क्यों चुना? धार्मिक शास्त्रों और भारतीय कला के आधार पर इसके तीन मुख्य कारण बताए गए हैं।
सांप किसी भी जीव के लिए खतरा, विष और अचानक होने वाली मौत का सबसे पुराना स्वाभाविक प्रतीक है। जब कोई सांप ध्यान मग्न बुद्ध, विष्णु या पार्श्वनाथ के सिर के ऊपर फन फैलाता है, तो यह दर्शाता है कि, डर पूरी तरह से खत्म हो गया है।
अनंत शेष
हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया जाता है कि, भगवान विष्णु क्षीर सागर में तैरते हुए हजार सिर वाले सांप पर आराम करते हैं। अनंत और शेष शब्द का अर्थ है कि, जो बचा रहता है। मेटाफिजिकल तौर पर समझा जाए तो जब पूरा यूनिवर्स डिसॉल्यूशन यानी प्रलय से गुजरता है, तो जो शेष बचता है वह है एनर्जी या मैटर जिसे खत्म नहीं किया जा सकता है।
जिस तरह सांप की केंचुली का उतरना, पुनर्जन्म और समय के चक्र के लिए शास्त्रों में एक शक्तिशली उदाहरण है। जैसे ब्रह्मांड अंतहीन चक्रों में बनता, चलता और खत्म हो जाता है, वैसे ही सांप लगातार खुद को नया करता रहता है।
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शिव और नागेश्वर
शिव पुराण और स्कंद पुराण जैसे कई ग्रंथों में भगवान शिव को गले में वासुकी सांप को गहने की तरह धारण किए हुए दिखाया जाता है। सांप जहर, डर, मौत और दुनिया की अस्त-व्यस्त ताकतों को दर्शाता है। शांति से सांप को गले में धारण करके शिव दर्शाते हैं कि, एक आत्म-ज्ञानी ने डर पर नियंत्रण पा लिया है। दुनियावी मोह के जहर को बदल दिया है और अहंकार कंट्रोल कर लिया है।
शिव के गले में सांप की तीन कुंडली तीन गुणों को दर्शाते हैं।
- सत्व (पवित्रता)
- राजस (गतिविधि)
- तमस (जड़त्व)
कुंडलिनी
कुंडलिनी का अर्थ है कुंडलित होता है। शास्त्रों में इसे आध्यात्मिक ऊर्जा को रीढ़ की हड्डी के बेस पर साढ़े तीन बार कुंडलित सोए हुए सांप के रूप में दिखाया जाता है।
जब कोई प्रैक्टिशनर पूरी लगन से नाड़ियों को शुद्ध करता है, तो यह सोई हुई ऊर्जा जाग जाती है और सेंट्रल चैनल यानी सुषुम्ना में ऊपर की ओर उठती है और अलग-अलग क्राउन पर शुद्ध चेतना से जा मिलती है। सांप की चाल रेंगते हुए समय नीची और जमीन से बंधी लेकिन जब वह अपना फन ऊपर उठाता है, तो शानदार इंसानी चेतना के भौतिक बंधन से आध्यात्मिक मुक्ति की ओर बदलाव को दिखाती है।
नाग
महाभारत और कई उपनिषदों में नागों को काफी बुद्धिमान, आधे दिव्य प्राणी के रूप में दर्शाया जाता है, जो पाताल लोक में निवास करते हैं। पवित्र ज्योमेट्री औऱ मंदिर के वास्तुकला में सांपों को दहलीज के गार्डियन के तौर पर दिखाया जाता है। दार्शनिक नजरिए से पाताल अवचेतन मन की गहरी गुफाओं को दर्शाता है। नागा लोग आध्यात्मिक, ज्ञान और गुप्त एनर्जी के छिपे हुए खजानों की रक्षा करते हैं।

सागा पतंजलि योग से जुड़ा सर्प अवतार
हिंदू परंपरा में योग सूत्र के लेखक ऋषि पतंजलि को अनंत शेष का अवतार माना गया है। पारंपरिक रूप से उन्हें आधा इंसान और आधा सांप के रूप में दिखाया जाता है और उनके सांपों के कई फन से ढका जाता है। दर्शन संपूर्ण ब्रह्मांड का सहारा है, और पतंजलि के रूप में प्रकट होकर वही कॉस्मिक ऊर्जा योग के जरिए इंसानी मन को स्ट्रक्चरल सहारा देती है।
यमुना नदी में कई सिर वाले कालिया नाग को युवा कृष्ण के द्वारा काबू में करने की कहानी, भागवत पुराण में पाई जाने वाली आध्यात्मिक जागृति की सबसे उचित कहानियों में से एक है।
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