यहां नाग पंचमी पर सांपों की नहीं, बिच्छुओं की होती है पूजा; शरीर पर रेंगते हैं जहरीले बिच्छु!
कर्नाटक के यादगिर जिले के कंदकूर गांव में नाग पंचमी पर सांपों की बजाय बिच्छुओं की पूजा की जाती है। ग्रामीण बिच्छुओं को अपने शरीर पर रेंगने देते हैं और ...और पढ़ें

कर्नाटक के इस गांव में बिच्छुओं की होती है पूजा (AI-Generated Image)
HighLights
कर्नाटक के यादगिर में बिच्छुओं की पूजा होती है।
नाग पंचमी पर ग्रामीण बिच्छुओं को शरीर पर रेंगने देते हैं।
मान्यता है कि इस दिन बिच्छू डंक नहीं मारते।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रकृति के दो अलग-अलग जीव सांप और बिच्छू स्वभाव से काफी विषैले होते हैं। ये दोनों ही सरसृप वर्ग के जीव हैं, जो खतरा महसूस होने पर अपने बचाव के लिए डंक मारते हैं। लेकिन कर्नाटक के यादगिर में चीजें इससे बिल्कुल विपरीत हैं। यहां रहने वाले ग्रामीणों के बीच बिच्छू के प्रति प्रेम का अलग ही जुनून सवार है।
दरअसल हर साल नाग पंचमी के मौके पर यादगिरी से करीब 20 किलीमीटर दूर स्थित कंदकूर गांव के लोग बिच्छू की मूर्ति की पूजा करते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि वे बिच्छुओं को अपने शरीर पर रेंगने भी देते हैं।

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नाग पंचमी के मौके पर कंदकोर गांव में बिच्छुओं की पूजा
नाग पंचमी के मौके पर जहां देशभर में अन्य लोग सांपों की पूजा करते हैं, वहीं कंदकोर गांव के लोग सांप के बजाय बिच्छू की देवी कही जाने वाली कोंडम्मई की पूजा करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचने के लिए लंबी पैदय यात्रा तय करते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दोपहर में बिच्छू मंदिर तक पैदल यात्रा शुरू करते हैं, जहां वे देवी की पूजा करने के साथ रास्ते में लोक गीत गाते हुए चेल्लिना बेट्टा या बिच्छुओं की पहाड़ी नामक स्थान पर आते हैं।
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श्रद्धालु बिच्छुओं के साथ खेलते हैं
मंदिर में बिच्छू की मूर्ति की पूजा करने के साथ यहां आने वाले श्रद्धालु जीवित बिच्छुओं के साथ खेलते भी हैं। वे बिच्छुओं को अपने ऊपर रेंगने भी देते हैं। कंदकोर के निवासी नाग पंचमी के मौके पर बिच्छू देवी कोंडम्मई की पूजा करते हैं, जबकि देश के अधिकतर भाग में नाग देवता की पूजा की जाती है।
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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि, नाग पंचमी के मौके पर मंदिर के आस पास हजारों की संख्या में बिच्छू आते हैं, अन्य किसी दिन उन्हें मंदिर के पास कभी नहीं देखा जाता है। कुछ लोग जीवित बिच्छुओं को पकड़कर उन्हें देवी की मूर्ति पर अर्पित करते हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि, इन बिच्छुओं के काटने की घटना अभी तक सामने नहीं है, लेकिन ये सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही नहीं काटते हैं, बाकि अन्य दिनों में काटते हैं। लोगों का मानना है कि, इस पवित्र अनुष्ठान का हिस्सा बनने के लिए आस-पास के जिलों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
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