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    भारत का अनोखा मंदिर, जहां खाना न मिलने पर 'दुबली' हो जाती है भगवान की मूर्ति!

    Updated: Fri, 12 Jun 2026 07:15 PM (IST)

    केरल के तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण स्वामी मंदिर में भगवान की मूर्ति को प्रतिदिन भोग न लगाने पर वह पतली होने लगती है। जानिए इसके पीछे का कारण? ...और पढ़ें

    केरल के तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण स्वामी मंदिर (Picture Credit AI- Generated Image)

    केरल के तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण स्वामी मंदिर (Picture Credit AI- Generated Image)

    HighLights

    1. केरल के तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर की अनोखी मान्यता।

    2. भोग न मिलने पर पतली हो जाती है भगवान की मूर्ति।

    3. पुजारी चाबी के साथ हथौड़ा भी रखते हैं भोग के लिए।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत एक ऐसा देश जो अपनी प्राचीन समृद्धि संस्कृति और खास मंदिरों के लिए जाना जाता है। ऐसे कई मंदिर जिनसे जुड़े चमत्कार और अनसुलझे रहस्यों के आगे विज्ञान भी हार मान जाता है। एक ऐसा ही मंदिर दक्षिण भारत के केरल राज्य में स्थित है, जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।

    मंदिर अपनी कहानियों के लिए काफी ज्यादा प्रचलित है। मंदिर से जुड़ी मान्यता कहती है कि, भगवान की मूर्ति को अगर एक दिन भी भोग न लगाया जाए तो उनकी मूर्ति पतली होने लगती है और यही कारण है कि रात 9 बजते ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और ठीक मंदिर के ताले 2 बजे रात को खुलते हैं और 3 बजे भगवान श्रीकृष्ण की इस दुर्लभ मूर्ति को खाना खिलाया जाता है। आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी खास कहानी?

    मंदिर से जुड़ी पौराणिक कहानी

    जहां ग्रहण के दौरान देशभर के तमाम मंदिर बंद हो जाते हैं, न कोई पूजा होती है और न ही भगवान को भोग चढ़ता है, वहीं केरल के तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण स्वामी मंदिर में चीजें थोड़ी अलग है। एक बार सूर्य ग्रहण के दौरान इस मंदिर को अन्य सभी मंदिरों की तरह बंद कर दिया गया लेकिन अगले दिन जब मंदिर के पुजारी द्वारा गर्भगृह खोला गया तो वे श्रीकृष्ण की मूर्ति को देखकर दंग रह गए, उन्होंने देखा कि, मूर्ति पहले से काफी ज्यादा पतली दिखाई दे रही है।

    केरल के मीनाचिल नदी के किनारे बसा ये सुंदर मंदिर अपने भव्य वास्तुकला और यहां मनाए जाने वाले उत्सव के लिए काफी फेमस है। इस मंदिर में स्थापित श्रीकृष्ण भगवान की मूर्ति सबसे खास है।

    तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर

    तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर

    पुजारी चाबी के साथ हथोड़ा भी रखते हैं

    सूर्य ग्रहण के दिन घटी इस घटना के बाद सभी पुजारी हैरान रह गए थे। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था, कि आखिर मूर्ति का ऐसा हाल हुआ कैसे? उस वक्त आदि शंकराचार्य मंदिर में दर्शन के लिए आए थे, उन्होंने बताया कि, श्रीकृष्ण को पूरे एक दिन तक भूखा रखना की वजह से ऐसा हुआ है और इसीलिए तब से लेकर आज तक मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को हर दिन भोग लगाया जाता है। भले ही सूर्य या चंद्र ग्रहण क्यों न हो?

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    ये एकमात्र ऐसा कृष्ण मंदिर है, जहां सबसे पहले रात के 3 बजे भोग लगाया जाता है और भगवान को सही समय पर भोग लगाने के लिए मंदिर के दरवाजे रात 2 बजे खोल दिए जाते हैं। इसीलिए यहां के पुजारी मंदिर की चाबियों के साथ हाथ में हथौड़ी लेकर जाते हैं ताकि अगर कभी गलती से भी चाबी से दरवाजा न खुले तो वह फौरन हथौड़े से ताला तोड़कर अंदर जा सके। वही भक्तों के लिए इस मंदिर के कपाट सुबह 5 बजे फिर से खोले जाते हैं और शाम को 7 बजे तक बंद कर दिए जाते हैं।

    भोग लगाना क्यों जरूरी?

    दरअसल मंदिर में स्थापित श्रीकृष्ण की यह मूर्ति भगवान के उस रूप को दर्शाती है, जिसमें उन्होंने कंस का वध किया था। कहा जाता है कि, युद्ध के बाद श्रीकृष्ण को काफी तेज भूख लग रही थी और इसलिए इस मंदिर में सही समय पर भोग चढ़ाना जरूरी होता है।

    अगर सही समय पर भगवान को भोग नहीं लगाया जाए तो मूर्ति पतली होने लगती है। इस मंदिर में स्थापित श्री कृष्णा की मूर्ति से कई तरह की कहानियां प्रचलित है।

    मंदिर का प्रसाद लेना जरूरी

    भगवान श्रीकृष्ण के इस मंदिर से जुड़ा एक नियम यह भी है कि, दर्शन के लिए आए भक्त बिना प्रसाद के न जाए। इसके अलावा भक्तों द्वारा प्रसाद बांटने की भी परंपरा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर का प्रसाद खाने से नवग्रह दोष, ग्रहण दोष, संतान से जुड़ा दोष, सर्प दोष, विवाह में अड़चन का दोष और ब्रह्म हत्या जैसे बड़े दोषों से मुक्त हो जाता है।

    मंदिर की दीवार पर चारों और से अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। इस मंदिर के पूर्व दिशा में कोचंबलम मंदिर है। जबकि उत्तर दिशा में शिव मंदिर और शिव मंदिर के साथ ही नरसिंह जी की भी मूर्ति है। पश्चिम दिशा की दिवारों पर गणपति, सुब्रमणियार और सास्ता के मंदिर, जबकि दक्षिण दिशा में यक्ष और गंधर्वों का मंदिर है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।