भगवान नटराज की मूर्ति में पैरों के नीचे दबा बौना कौन है? क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा?
भगवान नटराज की मूर्ति के नीचे दबा बौना जीव अज्ञान, अहंकार और मोह-माया का प्रतीक है। शिव ने इसे पूरी तरह नष्ट नहीं किया, बल्कि अपने पैरों के नीचे दबाकर ...और पढ़ें

नटराज भगवान के पैरों के नीचे कौन-सा प्राणी दबा है? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान शिव के कई ऐसे दिव्य और अनोखे रूप हैं, जिनको आज भी काफी पूजा जाता है, उसी में भगवान शिव का नटराज स्वरूप भी शामिल है। यह शिव का नृत्य करता रूप काफी दार्शनिक और रहस्यमयी है। भगवान नटराज की मूर्ति तमिलनाडु के चिदंबरम मंदिर में प्रतिष्ठित है।
माना जाता है कि, भगवान शिव ने यहां पर तांडव नृत्य (नाच) किया था। नटराज की मूर्ति के उनके पैर के नीचे एक बौना जीव दबा होता है? अधिकतर लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं, जबकि कई लोगों के मन में यह सवाल बार-बार आता है कि, आखिर वो जीवन कौन है?
भगवान नटराज के पैरों के नीचे कौन दबा है?
शिव पुराण के अनुसार, भगवान नटराज के पैरों के नीचे दबा हुआ बौना जीव 'अपस्मारा पुरुष' या मुयलक है। अपस्मारा पुरुष को अज्ञान, अहंकार, मोह-माया और अविद्या का प्रतीक कह गया है। माना जाता है कि, अपस्मारा ने सच्चाई की ओर दूसरों का मार्गदर्शन करने के बजाय भ्रम फैलाने, पवित्र शिक्षाओं को खराब करने और ज्ञान के रूप में अज्ञान को बढ़ावा दिया।
शास्त्रों में कहा गया है कि, विद्या के बिना ज्ञान अज्ञान (अविद्या) में बदल जाता है। यही कारण था कि, अपस्मारा ज्ञानोदय के बजाय आध्यात्मिक अवरोध का प्रतीक बन गया था। अपस्मारा एक डरावने भाव वाला बौना है, जो आधा इंसान और आधी परछाई है।
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अपस्मारा से जुड़ी पौराणिक कथा?
शिव पुराण के अनुसार, प्राचीन समय में वन में रहने वाले महान ऋषियों के मन में धीरे-धीरे अहंकार घर कर गया। उनके अनुष्ठान हथियार बन गए, उनका ज्ञान अहंकार में बदल गया। एक दिन महान ऋषियों द्वारा यज्ञ किया गया। उस अग्नि यज्ञ में से अजीब तरह के जीवन निकले। इन जीवों में सांप, जानवर और आखिर में एक बौना निकला। यह बौना कोई साधारण नहीं, बल्कि भ्रम से पैदा हुआ जीव था। जिसमें अहंकार, आध्यात्मिक अज्ञानता की शक्ति थी।
वह विश्व भर में भ्रम फैलाता हुआ घूमता रहा। बुद्धिमानों को उनकी बुद्धि भुला देता और अहंकारी लोगों को यह विश्वास दिलाता कि वे अजेय और अमर हैं। अपस्मारा पर ऋषियों का नियंत्रण खत्म हो गया। ऋषियों की अपनी रचना उन्हीं के ज्ञान को नष्ट करने लगी जिसकी वे पूजा करते थे।
तब ऋषियों ने भगवान शिव से मदद मांगी लेकिन योद्ध के रूप में नहीं, बल्कि नटराज के रूप में, इसके बाद भगवान शिव ने चेहरे पर शांत मुस्कान के साथ एक पैर उठाया और उसे अपस्मारा पर मजबूती और अडिगता से टिका दिया। भगवान शिव का नटराज रूप उसे मारने के लिए नहीं, बल्कि उसे काबू करने के लिए क्योंकि अज्ञान को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है।
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अगर यह हमेशा के लिए खत्म हो जाए तो ज्ञान का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। इसलिए भगवान नटराज ने उसे मारा नहीं, बल्कि जीवित रखा। लेकिन हमेशा शिव के पैरों के नीचे, उसे कभी उठने नहीं दिया जाता, कभी मन पर राज करने नहीं दिया जाता, इसलिए प्रत्येक नटराज की मूर्ति में यही मुद्रा दिखाई देती है। शिव ब्रह्मांड में संतुलन बिठाने के लिए नाच रहे हैं, जबकि उनका पैर अज्ञान को जमीन पर दबाए रखता है।
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