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700 साल पहले किसने खोजी थी माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा? पढ़ें पौराणिक कथा

Published: Thu, 02 Jul 2026 10:03 AM (GMT+05:30)

माता वैष्णो देवी मंदिर की खोज 700 साल पहले पंडित श्रीधर ने की थी, जब माता ने उन्हें सपने में गुफा का रास्ता दिखाया। जानिए इसके पीछे की प्रचलित कथा।

मां वैष्णो देवी मंदिर को पहली बार किसने खोजा था?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत के सबसे अत्यंत पूजनीय तीर्थस्थलों में शामिल है वैष्णो देवी का मंदिर, जो जम्मू और कश्मीर के त्रिकूट पहाड़ियों पर 5200 फीट की ऊंचाई पर बसा है। यहां माता रानी की 3 प्राकृतिक पिंडियां (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) वास करती हैं।

माता वैष्णो देवी के मंदिर के बारे में कई लोगों को पता होगा, लेकिन बहुत कम लोगों को ही इस बात की जानकारी होगी कि, इस मंदिर को पहली बार किसने खोजा था।

माता वैष्णो देवी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

श्री माता वैष्णो देवी जी की उत्पत्ति से जुड़ी कथा काफी प्रचलित है। माना जाता है कि, आज से 700 साल पहले इस मंदिर की खोज पंडित श्रीधर के द्वारा की गई थी, जिसके घर पर माता ने भंडारे के आयोजन में मदद की थी।

जब भैरव नाथ से बचने के लिए मां वैष्णो देवी भंडारे के बीच में ही चली गई थी, तो कहा जाता है कि, पंडित श्रीधर को ऐसा लगा कि, उनके जीवन में सब कुछ खत्म हो गया है। वे माता के यूं जाने से काफी परेशान हुए और उन्होंने भोजन-पानी तक त्याग दिया। अपने घर के कमरे में एकांतवास कर वैष्णो देवी के फिर से प्रकट होने की प्रार्थना करने लगे।

मां वैष्णो देवी मंदिर को पहली बार किसने खोजा था

मां ने श्रीधर को गुफा तलाश करने का आदेश दिया

श्रीधर को चिंता में देख तब माता वैष्णो देवी उनके सपने में प्रकट हुईं और उन्हें त्रिकुटा पर्वत की घाटियों में स्थित पवित्र गुफा में उनकी तलाश करने को कहा। माता ने श्रीधर को पवित्र गुफा का रास्ता दिखाया और व्रत तोड़ने का आग्रह किया।

पंडित श्रीधर तब पहाड़ों में पवित्र गुफा की तलाश में निकल पड़े। हर बार जब उन्हें लगता कि, वे रास्ता भटक चुके हैं, तो मां वैष्णो देवी उनके सपने में आकर उनका मार्गदर्शन करती और आखिर में वे अपनी मंजिल तक पहुंच गए।

श्रीधर के गुफा में प्रवेश करते ही उन्हें एक चट्टान दिखी जिसके ऊपर तीन पिंडियां थे। उसी पल माता वैष्णो देवी अपने पूर्ण वैभव के साथ श्रीधर के सामने प्रकट हुई और उन्होंने चट्टान के तीनों पिंड और गुफा में मौजूद अन् चिह्नों से पहचान कराया।

माता ने श्रीधर को चार पुत्रों का भी वरदान दिया और अपनी अवतार की पूजा करने का अधिकार प्रदान किया और उन्हें पवित्र तीर्थस्थल की महिमा का हर जगह प्रचार करने को भी कहा। पंडित श्रीधर ने अपना शेष जीवन पवित्र गुफा में मां वैष्णो देवी की सेवा में व्यतीत किया।

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Source: 

maavaishnodevi.org

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