केदारनाथ से लेकर कामाख्या मंदिर तक: भारत के 6 मंदिर जहां बिना इंसान के छुए खुद बजती हैं घंटियां!
भारत के छह ऐसे मंदिर जहां घंटियां बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने आप बजती हैं, जो भक्तों और वैज्ञानिकों दोनों को हैरान करती हैं। ...और पढ़ें

भारत के 6 मंदिर जहां घंटियां खुद बजती हैं (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मंदिर में लगी घंटियां मात्र आवाज पैदा करने का साधन नहीं है, बल्कि वे जागृति का प्रतीक भी है। जिनका उद्देश्य मन को शांत करने के साथ भक्त की उपस्थिति को ईश्वर के सामने प्रकट करना भी है। लेकिन क्या हो जब यही घंटियां बिना किसी इंसान के छूएं बजती हैं।
भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी घंटियों की कहानियां काफी हैरान करनी वाली है। इन खास मंदिरों की जुड़ी घंटियों को लेकर कहा जाता है कि, वे खुद बजती हैं, कभी प्रार्थना के दौरान तो कभी आधी रात को। आइए जानते हैं 6 ऐसे मंदिरों के बारे में जहां घंटियां बिना मानवीय स्पर्श के बजती हैं।
नागेश्वर मंदिर
गुजरात के द्वारका में स्थित नागेश्वर मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह न सिर्फ अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए चर्चित है, बल्कि अपनी रहस्यमयी घंटियों की आवाज के लिए भी जाना जाता है।
भक्तों का मानना है कि, कुछ खास रातों में मंदिर की घंटियां खुद बजने लगती है, मानो शिव की उपस्थिति दर्ज करा रहे हो। वैज्ञानिकों ने इसका असल कारण वायु के प्रवाह को बताया है, लेकिन यह घटना श्रद्धालुओं के बीच आस्था का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के लिए यह शिव द्वारा अपने भक्तों को स्वीकार करने का आसान तरीका है।
श्री महालक्ष्मी मंदिर
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर एक शक्तिपीठ है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। पूरा मंदिर भक्तों द्वारा अर्पित किए गए मंदिरों से भरा पड़ा है, लेकिन कुछ घंटियां खास तौर से प्रमुख पर्व के दौरान खुद बज उठती है।
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स्थानीय नागरिकों और मंदिरों के पुजारी का मानना है कि, ऐसा लगता है कि देवी खुद हमारी प्रार्थना स्वीकार कर रही हैं।
कामाख्या मंदिर
असम का कामाख्या मंदिर भारत के सबसे शक्तिशाली मंदिरों में शामिल है। तीर्थयात्री अक्सर मंदिर की घंटियों के अपने आप बजने की जानकारी देते हैं। खासतौर पर अंबूबाची मेले के दौरान।
विद्वान इसे कुदरती कंपन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के बीच इसे देवी का प्रत्यक्ष संदेश माना जाता है। तांत्रिक परंपराओं में ऐसी घटनाओं को देवी के जीवित और सक्रिय होने का संकेत मानता है।
जगन्नाथ पुरी
उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर को भी भारत के सबसे शक्तिशाली और पवित्र तीर्थस्थलों में गिना जाता है। यह कई ऐसे रहस्य हैं, जो भक्तों के साथ वैज्ञानिक को भी हैरान करते हैं। इन्हीं में से एक रहस्य उन घंटियों से भी जुड़ा है, जो कभी-कभी बिना छुए ही बज उठते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि, यह भगवान द्वारा प्रमुख अनुष्ठानों से पहले अपनी उपस्थिति का ऐलान करते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि, ऐसी घटनाएं अक्सर मंदिर के शुभ मुहूर्त के साथ मेल खाती है।
केदारनाथ मंदिर
उत्तराखंड में हिमालय की ऊंचाई में स्थित केदारनाथ भगवान शिव से जुड़े अत्यंत पावन तीर्थ स्थलों में शामिल है। भक्तों और पुजारियों द्वारा बताया जाता है कि, यहां घंटियां अपने आप बज उठती है।
खासकर तूफान के दौरान और देर रात जब कोई अंदर नहीं होता। कुछ लोग इसे तेज हवाओं का कारण भी मानते हैं, लेकिन अन्य लोगों का कहना है कि, इस ध्वनि में एक लय और समयबद्धता अचानक नहीं हो सकती है।
चिंतपूर्णी मंदिर
हिमाचल प्रदेश का चिंतपूर्णी मंदिर देवी चिंतपूर्णी को समर्पित है। भक्त अक्सर प्रार्थना के दौरान खुद बजने वाली घंटियों के बारे में बात करते हैं, मानो वे लोगों के लिए मंत्रों का उत्तर दे रही हों। पुजारी इसे देवी का आश्वासन मानते हैं कि, कोई भी प्रार्थना खाली नहीं जाती है।
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