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    पत्नी का श्राप और शनि की दृष्टि, वह कथा जो बताती है क्यों शनि देव की नजर से डरते हैं देव-दानव

    Updated: Tue, 31 Mar 2026 08:00 AM (IST)

    शनि देव (Lord Shani) की दृष्टि को अशुभ माना जाता है। इसीलिए हमेशा उनकी चरणों की ओर देखकर उनका दर्शन करना चाहिए। ...और पढ़ें

    Lord Shani: शनि देव की दृष्टि से जुड़ी कथा। (Ai Generated Image)

    Lord Shani: शनि देव की दृष्टि से जुड़ी कथा। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. शनि देव कर्मों के अनुसार फल देते हैं

    2. शनि देव की दृष्टि एक श्राप के कारण ही विनाशकारी बनी

    3. शनि देव भगवान कृष्ण के परम भक्त थे

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। वे व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों के आधार पर फल देते हैं। लेकिन शनि देव से जुड़ी एक बात जो सबसे ज्यादा लोगों को डराती है, वह है उनकी वक्र दृष्टि। ऐसी मान्यता है कि शनि देव की वक्र दृष्टि जिस पर भी पड़ती है, उसका विनाश तय है। चाहे वह राजा हो या फिर देवता, शनि भगवान की दृष्टि का प्रभाव किसी को नहीं छोड़ता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि न्याय के देवता (Lord Shani) की दृष्टि इतनी अशुभ क्यों मानी जाती है? तो आइए इसके पीछे की पौराणिक कथा को पढ़ते हैं, जो उनकी पत्नी के श्राप से जुड़ी है।

    shani dev katha

    क्यों अशुभ हुई शनि देव की दृष्टि?

    ब्रह्मपुराण के अनुसार, शनि देव बचपन से ही भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे। जब वे बड़े हुए, तो उनका विवाह चित्ररथ की पुत्री से हुआ, जो बहुत तेजस्वी थीं। एक बार शनि देव की पत्नी पुत्र प्राप्ति की इच्छा लेकर उनके पास पहुंचीं, लेकिन शनि देव उस समय भगवान कृष्ण के ध्यान में पूरी तरह लीन थे। उनकी पत्नी लंबे समय तक उनकी प्रतीक्षा करती रहीं, लेकिन शनि देव की समाधि नहीं टूटी।

    अंत में उन्होंने क्रोध में आकर शनि देव को श्राप दे दिया कि 'आज से तुम जिसे भी देखोगे, वह नष्ट हो जाएगा। तुम्हारी दृष्टि जिस पर भी पड़ेगी, उसका अमंगल होगा।' जब शनि देव का ध्यान भंग हुआ, तो उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ। उन्होंने अपनी पत्नी को मनाने की कोशिश की और उनकी पत्नी को भी अपने क्रोध पर पश्चाताप हुआ, लेकिन दिया गया श्राप वापस नहीं लिया जा सकता था। तभी से शनि देव की दृष्टि में यह अशुभता समा गई।

    देवताओं पर भी पड़ा प्रभाव

    ऐसा कहा जाता है कि इसी श्राप के कारण जब शनि देव भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर पहुंचे और उन्होंने बालक गणेश को देखा, तो गणेश जी का मस्तक कटकर अलग हो गया था। तब से ही शनि देव अपनी दृष्टि को हमेशा नीची रखते हैं, ताकि उनके प्रभाव से किसी निर्दोष का अहित न हो।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।