शास्त्रों के अनुसार कैसा था भगवान राम का स्वरूप? पढ़ें अनसुने रहस्य
वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में हनुमान जी ने माता सीता को भगवान श्री राम (Lord Ram) के दिव्य स्वरूप के बारे में विस्तार से बताया है। आइए यहां पढ़ते हैं।

Lord Ram: प्रभु श्री राम का दिव्य और अलौकिक स्वरूप। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Lord Ram: वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड का 35वां सर्ग में एक बेहद दिव्य प्रसंग के बारे में बताया गया है। यह वह क्षण है जब हनुमान जी माता सीता का विश्वास जीतने के लिए भगवान श्री राम के स्वरूप का वर्णन करते हैं। श्लोक संख्या 15 से 20 के बीच हनुमान जी ने प्रभु के जिस दिव्य विग्रह के बारे में बताया है, वह किसी भी भक्त के लिए राम की छवि को दिल में बसाने के लिए काफी है, तो आइए यहां हनुमान जी द्वारा वर्णित श्री राम के शारीरिक दिव्य और अलौकिक स्वरूप को जानते हैं।
दिव्य कद-काठी
हनुमान जी माता सीता को बताते हैं कि श्री राम का शरीर बेहद सुडौल, संतुलित है। उनकी ऊंचाई 96 अंगुल यानी 6 फीट है, जो एक आदर्श पुरुष की ऊंचाई मानी जाती है। उनके कंधे चौड़े और भुजाएं घुटनों तक लंबी हैं।
मुखमंडल
प्रभु का मुख कमल के समान शुभ और मनमोहक है। उनकी गर्दन शंख के समान सुंदर है, जिसे कम्बुग्रीव कहा गया है। इस पर तीन रेखाएं दिखाई देती हैं। उनके दांत कुंद के पुष्प के समान हैं। उनके होंठ, जीभ, मुख, आंखें और नाखून कमल के समान गुलाबी और कोमल हैं। उनके चौड़े माथे पर चार सूक्ष्म रेखाएं हैं, जो उनकी दीर्घायु और बुद्धि को दिखाती है।

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आंखें
श्री राम का रंग नीलकमल के समान सांवला है, जो देखने वाले की आंखों को शीतलता प्रदान करता है। उनकी आंखों के कोनों में हल्की लालिमा है, जो एक महान पराक्रमी वीर और न्यायप्रिय राजा के लक्षण है। उनकी भौहें धनुष के समान सुंदर और लंबी हैं।
स्वर और चाल की गरिमा
हनुमान जी वर्णन करते हैं कि प्रभु की वाणी नगाड़े के समान गंभीर, स्पष्ट और गूंजने वाली है। उनकी चाल में सिंह जैसी राजसी गरिमा, बाघ जैसी स्फूर्ति, हाथी जैसा धैर्य और नंदी जैसी शक्ति का अद्भुत संगम है। वे जब चलते हैं, तो पृथ्वी उनके भार और तेज से धन्य हो जाती है।
आध्यात्मिक और चारित्रिक गुण
शारीरिक सुंदरता के साथ-साथ हनुमान जी उनके गुणों पर भी प्रकाश डालते हैं। श्री राम यश, श्री और कीर्ति इन तीनों दैवीय गुणों से पूर्ण हैं। वे मनुष्य नहीं, बल्कि साक्षात धर्म के अवतार हैं, जो सत्य और मर्यादा की रक्षा के लिए अवतरित हुए हैं।
माता सीता को ऐसे हुआ विश्वास
हनुमान जी का यह वर्णन सुनकर माता सीता को पूर्ण विश्वास हो जाता है कि यह वानर सच में उनके प्रभु का ही दूत है। यह प्रसंग हमें बताता है कि श्री राम का व्यक्तित्व केवल बाहरी सुंदरता का मेल नहीं था, बल्कि वह तेज और मर्यादा का एक विराट स्वरूप था।
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