यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 22, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
...उसी के अनुसार अगला जन्म मिलेगा
हम सभी को इस जन्म में मनुष्य योनि मिली है, लेकिन जरूरी नहीं कि अगले जन्म में भी ऐसा ही हो। दरअसल, अगले जन्म में कौन-सी योनि मिलेगी, यह पूरी तरह के इस ...और पढ़ें

हम सभी को इस जन्म में मनुष्य योनि मिली है, लेकिन जरूरी नहीं कि अगले जन्म में भी ऐसा ही हो। दरअसल, अगले जन्म में कौन-सी योनि मिलेगी, यह पूरी तरह के इस जन्म के कर्मों पर निर्भर करता है।
हिंदू धर्म के विद्वान बताते हैं कि इस जन्म में इनसान के कर्म देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगले जन्म में उसे कौन-सी योनि मिलेगी। शास्त्रों में इसके तमाम उदाहरण मौजूद हैं।
जिन-जिन को इस जन्म में मनुष्य योनि मिली है, उन्हें अनंत जन्मों के संस्कार के अनुरूप यह सौभाग्य हासिल हुआ है। निम्नस्तरीय योनियों का हिसाब-किताब भी ऐसा ही है। हमारी चेतना की आगे की यात्रा ऐसी होती है कि सात्विक गुण वाले ऊपर के लोकों की ओर जाते हैं और रजो गुण वाले मनुष्त्व की ओर ही रहते हैं। जो तमो गुण प्रधान होते हैं वे निम्न स्तरीय योनियो में भ्रमण करते हैं।
एक नजर कर्म और अगले जन्म के संकेतों पर
- मान्यता है कि जो व्यक्ति परोपकारी स्वभाव का है, सद्गुण सम्पन्न है, दूसरों की मदद करता है, वह अगले जन्म में एक समाजसेवी, सभ्य, सुसंस्कृत और दयालु परिवार में जन्म लेता है।
- यदि व्यक्ति में धन का लालच नहीं है, उसके प्रति उदारवादी दृष्टिकोण है और धन का अच्छे कार्यों में नियोजन करता है तो अगले जन्म में उसे अनायास ही धन की प्राप्ति होती है। वह उस धन को फिर अच्छे कार्यों में ही लगाता है।
- यदि व्यक्ति बुद्धिमान है, विद्या दान करता है तो उसकी अंतः चेतना इस तरह की बन जाती है कि वह अगले जन्म में किसी भी विषय वस्तु को बहुत जल्दी सीख लेता है। इसके चलते उसे तीव्र बुद्धि या उच्च स्तरीय प्रज्ञा प्राप्त होती है।
- यदि व्यक्ति विद्यावान होकर भी अपनी विद्या दूसरों नहीं बांटता है, और उसे अपने तक ही सीमित रखता है तो ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में मतिमंद होता है। उसकी संचित विद्या का खजाना आगे नहीं बढ़ पाता है।
- यदि व्यक्ति अत्यंत गुस्सैल स्वभाव का है, उसमें बदला लेने की भावना है, तो मान्यता है कि वह अगले जन्म में सर्प की योनि में जाता है।
- यदि व्यक्ति धन के प्रति बहुत ज्यादा आसक्त है, और वो अपने पैसे को खर्च नहीं करता है। इस मोह के कारण वह उस धन से अलग नहीं हो सकता है तो ऐसा कहा जाता है कि वह सर्प बनकर उसके आसपास मंडराता रहता है।
- यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक आलसी स्वभाव का है, प्रमादी है, और जो कम समय में किए जाने वाले काम को बहुत अधिक समय में करता है, तो वह अगले जन्म में अजगर बनता है।
- यदि कोई बहुत अधिक विषय-वासना में डूबा रहने वाला है, तो उसे काम की अधिकता के कारण अगले जन्म में मंदबुद्धिता प्राप्त होती है और अपनी समस्त ऊर्जा का सही उपयोग नहीं कर पाता है।
अंत समय में जैसा चिंतन होता है, उसी के अनुसार अगला जीवन मिलता है। अंत समय का चिंतन व्यक्ति की मर्जी पर निर्भर नहीं करता है। उसके जो संस्कार चले आ रहे हैं, जीवनभर जो किया और उसका जो असर उसके मनक्षेत्र पर है, उसी के अनुसार चिंतन होगा और जैसा चिंतन होगा, उसी के अनुसार अगला जन्म मिलेगा। अंत मति सो गति।