किस्मत के बंद दरवाजे खोल देंगे अधिक मास के ये चमत्कारी उपाय, महादेव और श्रीहरि की बरसेगी कृपा
अधिक मास में अपनी सोई हुई किस्मत जगाने के लिए अपनाएं ये सरल ज्योतिषीय उपाय। ...और पढ़ें

Adhik Maas Special: दरिद्रता दूर करने के लिए अधिक मास में जरूर करें ये काम। (Ai Generated Image)
HighLights
यह माह आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत फलदायी माना गया है
इस महीने में विष्णु जी की पूजा से सभी अटके हुए काम पूरे होते हैं
इस मास में श्रीसूक्त का पाठ करने का भी महत्व है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अधिक माह, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। आध्यात्मिक साधना के लिए यह साल का सबसे पवित्र समय माना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों के अनुसार, इस दौरान किए गए दान, पुण्य और मंत्र जाप का फल अन्य महीनों की तुलना में दस गुना अधिक मिलता है। अगर आपके जीवन में प्रगति रुक गई है या आर्थिक तंगी बनी रहती है, तो अधिक मास के ये चमत्कारी उपाय आपकी किस्मत के बंद दरवाजे खोल सकते हैं। आइए इस माह से जुड़े सरल उपाय जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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दीपदान का महत्व
अधिक मास में दीपदान करने का बड़ा महत्व है। ऐसे में शाम के समय घर के मंदिर, तुलसी के पौधे के पास और शिवालय में गाय के घी का दीपक जलाएं। माना जाता है कि जो व्यक्ति इस पूरे माह अखंड दीप जलाता है या नियमित दीपदान करता है, उसके जीवन से अंधकार और दरिद्रता का नाश होता है।
विष्णु सहस्रनाम और महामृत्युंजय जाप
यह महीना पुरुषोत्तम यानी भगवान श्रीहरि का है, इसलिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इसके साथ ही, इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। प्रतिदिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।
दान की महिमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में कांसे के पात्र में मालपुआ रखकर दान करना संतान सुख और समृद्धि प्रदान करता है। इसके अलावा इस दौराव जल, सत्तू, छाता और जूते-चप्पल का दान भी बहुत पुण्यदायी माना गया है।
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तुलसी और पीपल की सेवा
रोजाना सुबह स्नान के बाद पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाकर परिक्रमा करें। पीपल में भगवान विष्णु और महादेव दोनों का वास माना गया है, जिससे पितृ दोष भी शांत होते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।