100 यज्ञों के समान पुण्य देती है 'अधिक पूर्णिमा', जल्दी से नोट करें स्नान-दान का मुहूर्त
31 मई को पूर्णिमा और अधिक मास का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह समय आपके जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लाने का सबसे बड़ा माध्यम है।

अधिक मास पूर्णिमा पर जानें स्नान-दान का मुहूर्त (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में आने वाली पूर्णिमा सबसे दिव्य और दुर्लभ मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार, यह साधारण पूर्णिमा से कई गुना अधिक फलदायी होती है। यह तिथि मनुष्य के लिए सभी सिद्धियों के द्वार खोलती है। चलिए पढ़ते हैं अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का मुहूर्त क्या रहने वाला है।
स्नान दान का मुहूर्त
अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त को माना जाता है, जो इस प्रकार रहने वाला है -
ब्रह्म मुहूर्त - प्रातः 4 बजकर 3 मिनट से प्रातः 4 बजकर 43 मिनट तक
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय - शाम 7 बजकर 36 मिनट तक

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अधिकमास पूर्णिमा का महत्व
स्कन्दपुराण और पद्मपुराण आदि धर्म ग्रंथों में अधिक मास की पूर्णिमा को 'सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा' भी कहा गया है। अर्थात यह पूर्णिमा हर प्रकार की मनोकामना को सिद्ध करने वाली है। विभिन्न पुराणों के अनुसार, इस पावन तिथि पर श्रद्धापूर्वक किया गया कोई भी धार्मिक कार्य जैसे दान, जप, व्रत और कथा श्रवण करने से जातक को 100 यज्ञों के समान पुण्य मिलता है।
अधिक पूर्णिमा पर भगवान नारायण और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है। इस दिन दोनों की एक साथ आराधना करने से घर में असीम सुख-समृद्धि की कृपा बरसती है। साथ ही जाने-अनजाने में हुए सभी पापों का नाश होता है।
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अधिक पूर्णिमा पर क्या करें?
- अधिक पूर्णिमा के इस स्वर्णिम अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए सबसे पहले अपने मन को शांत रखें और नारायण का ध्यान करें।
- इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा या किसी भी अन्य पवित्र नदी के तट पर स्नान करें।
- अगर किसी पवित्र नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- इस तिथि पर किया गया दान अक्षय रहता है। ऐसे में अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, या तिल का दान करें।
- इस दिन अपने घर में या आस-पास भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन करें या उसमें शामिल हों।
- इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण या वाचन जरूर करना चाहिए, जिससे घर का वातावरण शुद्ध होता है।
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