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    अधिक पूर्णिमा पर बिना पंडित के भी कर सकते हैं सत्यनारायण पूजा, पढ़ें बेहद सरल और संपूर्ण विधि

    Updated: Fri, 29 May 2026 09:38 AM (IST)

    अगर आप सरल विधि से पूरी श्रद्धा के साथ अधिक पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजन करते हैं, तो भगवान आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। ...और पढ़ें

    अधिक पूर्णिमा पर करें सत्यनारायण पूजा (Picture Credit- AI Generated)

    अधिक पूर्णिमा पर करें सत्यनारायण पूजा (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अधिक मास की पूर्णिमा का बहुत अधिक आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जो इस बार रविवार 31 मई को मनाई जाएगी। इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

    पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा करने का भी विशेष महत्व है। चलिए जानते हैं कि आप कैसे बिना पंडित के सरल विधि से घर पर ही भगवान सत्यनारायण की पूजा कर सकते हैं।

    आवश्यक पूजन सामग्री

    पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्रियां एकत्रित कर लें, ताकि पूजा के बीच में बाधा न आए -

    • सत्यनारायण भगवान की मूर्ति या तस्वीर।
    • पीला वस्त्र (पूजा की चौकी पर बिछाने के लिए)।
    • तांबे या मिट्टी का कलश, आम या केले के पत्ते और एक पानी वाला नारियल।
    • रोली, चंदन, मौली (मिश्री/कलावा) और अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)।
    • ताजे फूल और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते)।
    • पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर का शुद्ध मिश्रण)
    • प्रसाद के लिए आटे की भुनी हुई पंजीरी, चूरमा और केले का फल।
    Satyanarayan AI (1)
    (Picture Credit- AI Generated)

    पूजा की सरल विधि

    बिना पंडित के भी आप पूरी शुद्धता और श्रद्धा के साथ इन चरणों का पालन करके पूजा संपन्न कर सकते हैं -

    • सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
    • इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ करें।
    • एक साफ चौकी रखकर उस पर पीला कपड़ा बिछाएं।
    • चौकी पर सत्यनारायण भगवान की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
    • इसके बाद एक कलश में शुद्ध जल भरकर, उसके ऊपर आम के पत्ते रखें और उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें।
    • भगवान और कलश को रोली-चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
    • भगवान के सम्मुख घी का दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद उन्हें फल, पंचामृत और आटे की 'पंजीरी-चरणामृत' का भोग लगाएं।
    • अब शांत मन से बैठकर 'श्री सत्यनारायण व्रत कथा' का पाठ करें या परिवार के साथ मिलकर इसे सुनें।
    • कथा पूर्ण होने के बाद कपूर या घी के दीपक से भगवान सत्यनारायण की आरती उतारें।
    Satyanarayan AI
    (Picture Credit- AI Generated)

    ध्यान रखने योग्य बातें

    भगवान विष्णु को कोई भी भोग बिना तुलसी के अधूरा माना जाता है। इसलिए भगवान सत्यनारायण के भोग में तुलसी का पत्ता शामिल करना न भूलें। पूजा के दौरान और पूरे दिन घर का वातावरण पूरी तरह सात्विक रखें। घर के सभी सदस्य मिलकर एक साथ कथा सुनेंगे तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ेगा।

    पूजा और आरती संपन्न होने के बाद सबसे पहले स्वयं चरणामृत लें और फिर परिवार के सभी सदस्यों व आस-पड़ोस में पंचामृत और पंजीरी का प्रसाद पूरी श्रद्धा के साथ बांटें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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