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    गणेश पूजा हो या सत्यनारायण कथा, पंचामृत के बिना अधूरी है भगवान की पूजा, पढ़ें इसका महत्व

    Updated: Fri, 27 Mar 2026 01:32 PM (GMT+05:30)

    किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ या अनुष्ठान में पंचामृत (panchamrit) का इस्तेमाल जरूरी रूप से किया जाता है, जो दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बनता है। ...और पढ़ें

    पूजा में क्यों है पंचामृत आवश्यक (AI Generated Image)

    पूजा में क्यों है पंचामृत आवश्यक (AI Generated Image)

    HighLights

    1. पांच दिव्य तत्वों का पवित्र मिश्रण है पंचामृत

    2. शरीर और मन के पंच तत्वों को करता है संतुलित

    3. इसके सेवन से आत्मा शुद्ध होती है और पाप मिटते हैं

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पंचामृत को सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है, जो पूजा के बाद प्रसाद के रूप में भक्तों में बाटा जाता है। न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी पंचामृत का काफी महत्व बताया गया है। इतना ही नहीं, हिंदू धर्म शास्त्रों में पंचामृत को अमृत समान माना गया है। आज हम आपको इस द्विव्य प्रसाद के बारे में बताने जा रहे हैं।

    पंचामृत का महत्व

    पंचामृत पांच दिव्य तत्वों का मिश्रण है, जो शरीर को शुद्ध करने के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का भी काम करता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पंचामृत में शामिल पांच सामग्रियां हमारे शरीर के पंच तत्वों को शुद्ध करने का काम करती हैं। माना जाता है कि पूजा के अंत में सभी लोगों में पंचामृत बांटने से भक्तों पर भगवान का आशीर्वाद बना रहता है।

    Panchamrit i

    (AI Generated Image)

    पांच तत्व किसका हैं प्रतीक

    • दूध - दूध पंचामृत का मुख्य घटक है। पंचामृत में विशेषकर गाय के दूध का इस्तेमाल किया जाता है। पंचामृत में शामिल दूध आत्मा के पोषण का प्रतीक माना गया है।
    • दही - पंचामृत में दही का भी मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। दूध की तरह ही दही भी शुद्धता और संरक्षण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वहीं अगर इसके स्वास्थ्य लाभ की बात की जाए, तो दही शरीर में वात दोष को कम करने में मदद करता है।
    • शहद - औषधीय गुणों से भरपूर शहद का भी पंचामृत में इस्तेमाल किया जाता है। शहद को जीवन शक्ति और समृद्धि का प्रतीक समझा जाता है।
    • घी - पंचामृत में शामिल घी (गाय के दूध से बना) अपनी शुद्धता और पौष्टिक गुणों के लिए प्रसिद्ध है। घी को अग्नि देव को पवित्र आहुति के रूप में अर्पित किया जाता है। ऐसे में घी दिव्य कृपा और देवताओं से शक्ति व विजय का आशीर्वाद मांगने का प्रतीक है।
    • शक्कर - पंचामृत में इस्तेमाल की जाने वाली मिश्री या शक्कर को जीवन में मिठास, आनंद और प्रसन्नता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    मिलता है ये लाभ

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचामृत ईश्वर के प्रति भक्ति भाव को बढ़ाने का भी काम करता है। इसमें शामिल 5 पवित्र द्रव्य का शरीर और मन में पंच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) को संतुलित करने का भी काम करते हैं। इसके साथ ही पंचामृत ढेरो औषधीय गुणों से भी भरपूर है, जिसका आयुर्वेद में भी विशेष महत्व माना गया है। साथ ही शिव पुराण के अनुसार, देवी-देवताओं का पंचामृत से अभिषेक करने से आत्मा शुद्ध होती है और व्यक्ति को पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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