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    Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा के दौरान न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा शुभ फल

    Updated: Fri, 27 Mar 2026 01:16 PM (GMT+05:30)

    चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2026) के लिए लाखों श्रद्धालु तैयारी कर रहे हैं। इस साल यह यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होगी। ...और पढ़ें

    Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा के नियम। (Ai Generated Image)

    Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा के नियम। (Ai Generated Image)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड की देवभूमि में स्थित गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा, जिसे चारधाम यात्रा कहा जाता है। साल 2026 की चारधाम यात्रा के कपाट जल्द ही खुलने वाले हैं और लाखों श्रद्धालु इस पावन यात्रा की तैयारी में जुटे हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह यात्रा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। 

    अक्सर श्रद्धालु उत्साह में आकर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे न केवल उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि यात्रा का पूरा फल भी नहीं मिलता है। ऐसे में अगर आप भी 2026 में चारधाम जाने का मन बना रहे हैं, तो इन नियमों का पालन जरूर करें, जो इस प्रकार हैं -

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    भूलकर भी न करें ये गलतियां

    यात्रा इस तरह शुरू करें

    शास्त्रों में चारधाम यात्रा का एक निश्चित क्रम बताया गया है। यात्रा हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर करनी चाहिए, यानी सबसे पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ के दर्शन करने चाहिए। इस क्रम को तोड़ने से यात्रा अधूरी मानी जाती है।

    खान-पान में पवित्रता

    चारधाम की पूरी यात्रा के दौरान मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। कई लोग ठंड से बचने के नाम पर नशीले पदार्थों का सहारा लेते हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से गलत है, बल्कि सेहत के लिए भी नुकसानदायक है।

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    प्रकृति की पवित्रता

    हिमालय को देवताओं का घर माना जाता है। ऐसे में यात्रा के दौरान गंगा-यमुना में प्लास्टिक, कचरा या गंदगी फैलाना भारी पाप माना गया है। ऐसा करने से तीर्थ का पुण्य फल नष्ट हो जाता है।

    मंदिर की गरिमा

    आजकल लोग मंदिर के गर्भगृह या अन्य क्षेत्रों में फोटो खींचने और वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं, जो कि एक तरह से पूजा के नियमों को तोड़ता है। ऐसे में मंदिर की गरिमा और नियमों का पालन करें।

    जल्दबाजी

    पहाड़ों की चढ़ाई के दौरान जल्दबाजी से बचें। कुछ लोग जल्दबाजी के चलते धक्का-मुक्की करने लगते हैं, जिससे दूसरे भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और यात्रा का शुभ फल नहीं मिलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।