क्यों भगवान शिव को धारण करना पड़ा बैल का रूप? पढ़ें शिव पुराण का अनसुना रहस्य
क्या आप जानते हैं कि महादेव ने स्वयं भगवान विष्णु के पुत्रों का संहार क्यों किया था? पढ़ें शिव पुराण की वो दुर्लभ कथा, जब धर्म की रक्षा के लिए शिव जी ...और पढ़ें

भगवान शिव ने क्यों लिया बैल का रूप? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म की पौराणिक कथाएं कई ऐसे गहरे रहस्यों से भरी हैं, जो हमें धर्म और कर्तव्यों का बोध कराती हैं। ऐसी ही एक हैरान कर देने वाली कथा शिव पुराण में मिलती है। जहां भगवान शिव को स्वयं भगवान विष्णु के पुत्रों का वध करना पड़ा था।
पाताल लोक में भगवान विष्णु का प्रवास
शिव पुराण की शतरुद्र संहिता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब कलश से अमृत निकला, तो राक्षसों का ध्यान भटकाने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया से 'मोहिनी' का रूप धारण किया और कई सुंदर अप्सराएं भी प्रकट कीं। असुर उन अप्सराओं के रूप पर इतने मुग्ध हो गए कि वे उन्हें अपने साथ पाताल लोक ले गए। बाद में, जब देवताओं ने अमृत पान कर लिया और देव-असुर युद्ध खत्म हो गया, तब बचे हुए दैत्यों का सर्वनाश करने के लिए श्री हरि विष्णु स्वयं पाताल लोक गए।
जब विष्णु जी ने अप्सराओं को मुक्त कराया
जब देव-असुर संग्राम (समुद्र मंथन) समाप्त हुआ और देवताओं को अमृत मिल गया, तब सृष्टि में पूर्ण शांति स्थापित करने के लिए भगवान विष्णु शेष बचे राक्षसों का संहार करने पाताल लोक की ओर गए। हमारे प्राचीन ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, पाताल लोक में राक्षसों का विनाश करने के बाद विष्णु जी ने वहां कैद कुछ अप्सराओं को मुक्त कराया था।

(Image Source: AI-Generated)
लेकिन, यहीं से घटना ने एक नया मोड़ ले लिया। वे अप्सराएं श्री हरि विष्णु के मनमोहक रूप पर पूरी तरह मुग्ध हो गईं और उन्होंने अपने वरदान और आकर्षण के बंधन में भगवान विष्णु को बांध लिया। इस माया के प्रभाव के कारण भगवान विष्णु वैकुंठ लौटने के बजाय पाताल लोक में ही निवास करने लगे।
खबरें और भी
भगवान विष्णु के अधर्मी पुत्रों का नाश
शिव पुराण में इस प्रसंग का जिक्र मिलता है कि पाताल लोक में रहने के दौरान, भगवान विष्णु और उन अप्सराओं से कई पुत्र उत्पन्न हुए। लेकिन दुर्भाग्यवश, ये पुत्र देवताओं या अपने पिता के समान धर्मपरायण नहीं थे। उनका स्वभाव राक्षसों जैसा अत्यंत क्रूर और अधर्मी था। उन्होंने स्वर्ग से लेकर पृथ्वी तक तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया और भयंकर विनाश करने लगे। उनके इन बढ़ते अत्याचारों से घबराकर सभी देवता अंततः भगवान शिव की शरण में कैलाश पर्वत पहुंचे और उनसे रक्षा की गुहार लगाई।
जब महादेव ने धारण किया बैल का रूप
देवताओं की पुकार सुनकर महादेव ने सृष्टि की रक्षा का निर्णय लिया। धर्म ग्रंथों में उल्लेख है कि विष्णु जी के इन अधर्मी पुत्रों का संहार करने के लिए ही भगवान शिव ने एक विशाल और रौद्र बैल यानी 'वृषभ अवतार' धारण किया था। वृषभ रूप में भगवान शिव सीधे पाताल लोक पहुंचे और विष्णु जी के उन अत्याचारी पुत्रों का वध कर दिया, ताकि ब्रह्मांड को उनके विनाशकारी प्रकोप से बचाया जा सके।
अप्सराओं के मायाजाल से कैसे मुक्त हुए भगवान विष्णु
पुत्रों के वध के बाद आखिरकार उन अप्सराओं का मायाजाल टूट गया और उन्होंने भगवान विष्णु को अपने वरदान के बंधन से मुक्त कर दिया। जैसे ही माया का पर्दा हटा, श्री हरि को अपनी वास्तविक स्थिति और शिव जी के वृषभ अवतार लेने के कारण का ज्ञान हो गया। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पुत्र अधर्म के मार्ग पर चले गए थे और उनका अंत लोक कल्याण के लिए बेहद जरूरी था। कहा जाता है कि इस घटना के बाद जब भगवान विष्णु पाताल लोक से वापस प्रस्थान कर रहे थे, तो वे अपना सुदर्शन चक्र वहीं छोड़ गए थे।
यह भी पढ़ें- क्यों त्रिजटा के सामने बेबस हो जाता था रावण? पढ़ें यह पौराणिक कथा
यह भी पढ़ें- Basant Panchami 2026: ब्रह्मा जी की मानस संतान हैं मां सरस्वती? जानें पौराणिक कथा और महत्व
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।