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    भगवान विष्णु को किसने दिया पत्थर बनने का श्राप? यहां पढ़ें शालिग्राम के अवतार की कथा

    Updated: Tue, 24 Mar 2026 02:00 PM (IST)

    सनातन धर्म में शालिग्राम की पूजा का विशेष महत्व है, जिससे जीवन में खुशियां और समृद्धि आती है। ...और पढ़ें

    कैसे अवतरित हुए शालिग्राम? (AI Generated Image)

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    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान शालिग्राम की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोजाना भगवान शालिग्राम की विधिपूर्वक साधना करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। क्या आपको पता है कि कैसे अवतरित हुए भगवान शालिग्राम? अगर नहीं पता, तो आइए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कैसे प्रकट हुए भगवान शालिग्राम।

    Shaligram puja vidhi

    (AI Generated Image)

    भगवान शालिग्राम की कथा

    पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में जालंधर नाम का एक असुर था और उसकी पत्नी का नाम वृंदा था। वह भगवान विष्णु की परम भक्त थी। जालंधर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था, जिससे परेशान होकर देवी-देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। बता दें कि वृंदा के सतीत्व के प्रभाव से जालंधर अजेय हो गया था। जब देवताओं को इस बात का पता चला कि जब तक वृंदा का सतीत्व भंग नहीं होता, तब तक जालंधर का वध करना असंभव है।

    भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए एक कठोर कदम उठाया। उन्होंने जालंधर का रूप धारण कर वृंदा के पास पहुंचे। उनको वृंदा ने अपना पत्नी समझकर स्पर्श किया और अनजाने में वृंदा का सतीत्व खंडित हो गया। वृंदा का पतिव्रता धर्म टूट जाने पर शक्तियां क्षीण हो गईं और महादेव ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।

    इसके बाद जब वृंदा को पता चला कि भगवान विष्णु ने उसके साथ छल किया है, तो उन्होंने प्रभु को निर्जीव पत्थर बनने का श्राप दिया, जिसके बाद वे पत्थर में परिवर्तित हो गए। इस श्राप की वजह से मां लक्ष्मी नाराज हुईं और वृंदा से अपना श्राप वापस लेने की विनती की। इसके बाद वृंदा ने प्रभु को श्राप से मुक्तकर दिया, लेकिन पति वियोग के दुख में वृंदा ने आत्मदाह कर लिया।

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    जिस स्थान पर वृंदा की राख गिरी, उसी स्थान पर पौधा उत्पन्न हुआ। श्रीहरि ने उस पौधे को तुलसी का नाम दिया और वरदान दिया कि हे वृंदा! आज से मेरी पूजा शालिग्राम के रूप में होगी और आप सदैव तुलसी के रूप में मेरे साथ रहोगी।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।