Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बिना मुहूर्त पूछे करें शादी और गृह प्रवेश! 20 अप्रैल को साल का सबसे बड़ा दिन

    Updated: Tue, 10 Mar 2026 05:30 PM (GMT+05:30)

    Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया कब है? पढ़ें अप्रैल का शुभ मुहूर्त और महत्व। इस 'अबूझ मुहूर्त' में कैसे करें नई शुरुआत और क्या करें दान। ...और पढ़ें

    Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया का महत्व (Image Source: AI-Generated)

    Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया का महत्व (Image Source: AI-Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। साल 2026 की शुरुआत के साथ हम धीरे-धीरे उन त्योहारों की ओर बढ़ रहे हैं, जो हमारी संस्कृति में सुख और समृद्धि का द्वार खोलते हैं। इन्हीं में से एक अक्षय तृतीया का पर्व है। इसे 'अखा तीज' भी कहा जाता है।

    हिंदू पंचांग के मुताबिक, वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। साल 2026 में यह महापर्व 20 अप्रैल, सोमवार को मनाया जाएगा।

    ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इस दिन 'अबूझ मुहूर्त' होता है। इसका मतलब है कि अगर आप कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, तो कर सकते हैं। गृह प्रवेश से लेकर शादी-ब्याह की तारीख देख रहे हैं, तो आपको किसी पंडित जी से अलग से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं है। यह पूरा दिन ही मंगलकारी है।

    क्यों खास है यह दिन?

    'अक्षय' शब्द का अर्थ ही है जिसका कभी 'क्षय' न हो, यानी जो कभी खत्म न हो। शास्त्रों में इस दिन के बारे में कई दिलचस्प बातें लिखी हैं:

    सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ: भविष्य पुराण के अनुसार, इसी पावन तिथि से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी।

    परशुराम जयंती: इसे भगवान विष्णु के छठे अवतार, श्री परशुराम जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

    akshaya 2026

    (Image Source: AI-Generated)

    गंगा का आगमन: ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं।

    बद्रीनाथ के कपाट: उत्तराखंड में स्थित भगवान बद्रीविशाल के मंदिर के कपाट भी इसी दिन खोले जाते हैं।

    'दान' का है असली महत्व

    आजकल अक्षय तृतीया का मतलब सिर्फ सोना खरीदने तक सीमित हो गया है। लेकिन, अगर हम अपनी जड़ों की ओर देखें, तो यह दिन 'देने' का है।

    शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान अक्षय रहता है (हमेशा साथ रहता है)। इस मौसम में गर्मी शुरू हो जाती है, इसलिए पुराने समय से ही इस दिन पानी से भरे घड़े (कलश), पंखे, सत्तू, खरबूजा और चप्पल दान करने की परंपरा रही है।

    यह भी पढ़ें- Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया कब है? यहां पता करें सही तिथि और सोना खरीदने का शुभ समय

    यह भी पढ़ें- Akshay Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पर ग्राहकों से गुलजार रहा धनबाद का बाजार, 193 करोड़ का हुआ कारोबार

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

    खबरें और भी