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अक्षय तृतीया 2026: आखिर सोने में ही क्यों बसती हैं मां लक्ष्मी, लोहा या पीतल खरीदना क्यों नहीं शुभ?

Published: Fri, 17 Apr 2026 11:03 AM (IST)

अक्षय तृतीया पर हम सोना ही क्यों खरीदते हैं? लोहा, तांबा या कोई और धातु क्यों नहीं? जानिए इसके पीछे का पौराणिक रहस्य।

अक्षय तृतीया पर क्यों होती है सोने की खरीदारी? (Image Source: AI-Generated)

अक्षय तृतीया पर क्यों होती है सोने की खरीदारी? (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल जब अक्षय तृतीया आती है, तो ज्वेलरी की दुकानों पर भारी भीड़ नजर आती है। लोग छोटा सा सिक्का ही सही, लेकिन सोना जरूर खरीदना चाहते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन सिर्फ 'सोने' पर ही इतना जोर क्यों दिया जाता है? क्या यह सिर्फ एक परंपरा है या इसके पीछे कोई ठोस धार्मिक और वैज्ञानिक कारण है?

'अक्षय' का अर्थ क्या है?

सबसे पहले 'अक्षय' शब्द को समझते हैं। 'अक्षय' का अर्थ होता है जिसका कभी 'क्षय' न हो, यानी जो कभी खत्म न हो। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस दिन आप जो भी शुभ कार्य करते हैं या जो भी कीमती वस्तु खरीदते हैं, उसका फल आपको अनंत काल तक मिलता है। लोग मानते हैं कि इस दिन सोना घर लाने से परिवार की संपत्ति कभी कम नहीं होती, बल्कि वह 'अक्षय' हो जाती है।

सोने का मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु से कनेक्शन

सोने को न केवल एक धातु, बल्कि शुद्धता और शक्ति का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसे मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।

अक्षय पात्र की कथा: माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को 'अक्षय पात्र' दिया था, जिसमें भोजन कभी खत्म नहीं होता था।

सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन से त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। नए युग की शुरुआत को समृद्धि से जोड़ने के लिए सोने की खरीदारी को श्रेष्ठ माना गया।

सूर्य की चमक जैसा भाग्य

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी सबसे उच्च राशि में होते हैं। सूर्य को 'सोने' का कारक माना जाता है। चूंकि इस दिन सूर्य की ऊर्जा अपने चरम पर होती है, इसलिए सोना खरीदना आपके भाग्य को सूर्य जैसी चमक प्रदान करने वाला माना जाता है। यह निवेश केवल दिखावा नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का एक आध्यात्मिक तरीका भी है।

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(Image Source: AI-Generated)

हालांकि, आज के समय में सोना खरीदना बहुत लोकप्रिय हो गया है, लेकिन शास्त्रों में इस दिन 'दान' करने को सोने की खरीदारी से भी ज्यादा महत्व दिया गया है। माना जाता है कि आज किया गया दान अगले कई जन्मों तक 'अक्षय' रहता है।

शास्त्रों में क्या लिखा है?

अक्षय तृतीया के महत्व का वर्णन मुख्य रूप से 'भविष्य पुराण' और 'मत्स्य पुराण' में मिलता है। इन ग्रंथों में साफ कहा गया है कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया गया दान, स्नान और खरीदारी 'अक्षय' (अमर) हो जाती है। इसके अलावा, 'नारद पुराण' में भी इस दिन नई वस्तुओं के निवेश को शुभ बताया गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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