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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Amalaki Ekadashi 2025: आमलकी एकादशी पर इन खास चीजों का दान करने से धन-दौलत में होगी वृद्धि

    Updated: Sun, 02 Mar 2025 11:26 AM (IST)

    आमलकी एकादशी बेहद कल्याणकारी मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस साल यह फाल्गुन महीने में 10 मार्च (Amalaki Ekadashi Kab hai 202 ...और पढ़ें

    Amalaki Ekadashi 2025: आमलकी एकादशी पर करें ये कार्य।
    Amalaki Ekadashi 2025: आमलकी एकादशी पर करें ये कार्य।

    HighLights

    1. आमलकी एकादशी बेहद कल्याणकारी मानी जाती है।
    2. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।
    3. इस साल यह 10 मार्च को मनाई जाएगी।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आमलकी एकादशी का उपवास हर साल फाल्गुन महीने में रखा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी दुखों का अंत होता है। इसके साथ ही सभी मनाकामनाओं की पूर्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी 10 मार्च (Amalaki Ekadashi Kab hai 2025) को मनाई जाएगी। वहीं, इस दिन दान करने की भी मान्यता है, तो चलिए यहां जानते हैं कि इस मौके पर क्या दान करना चाहिए?

    आमलकी एकादशी पर करें ये दान (Amalaki Ekadashi 2025 Par Karen Ye Daan)

    आमलकी एकादशी के दिन धन, आंवले, पीले चीजें (फल व वस्त्र आदि), धन, गुलाल और अन्न का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा कहते हैं कि इस दिन इन चीजों का दान (Daan List) किसी जरूरतमंद व्यक्ति को ही करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति का सौभाग्य बढ़ता है। इसके साथ विष्णु जी खुश होते हैं और घर में माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

    आमलकी एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त (Amalaki Ekadashi 2025 Shubh Yog)

    इस पर्व पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 36 मिनट से अगले दिन मध्य रात्रि 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही अमृत काल शाम 06 बजकर 12 मिनट से 07 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

    वहीं, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है।

    पूजा मंत्र (Puja Mantra)

    1. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः।

    2. शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्

    लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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