आषाढ़ अमावस्या पर बदल रही ग्रहों की चाल, मिथुन और कर्क समेत इन 4 राशियों पर मंडराएगा संकट
14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या पर ग्रहों की चाल से मिथुन, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। पितरों के तर्पण के साथ दान-पुण्य और ...और पढ़ें
-1783923337919_m.webp)
किन राशियों की बढ़ेगी मुश्किलें? (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या (Ashadha Amavasya 2026 Date) मनाई जाएगी। इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विधान है। इससे पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
इस बार आषाढ़ अमावस्या पर ग्रहों की चाल के प्रभाव से राशि के जातकों को सतर्क रहने की जरूरत है। कुछ राशियों कोपरेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए आपको एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार बताते हैं कि आषाढ़ अमावस्या पर किन राशि वालों को सावधानी बरतनी चाहिए।
ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि आषाढ़ अमावस्या पर ग्रहों की चाल और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को देखते हुए ज्योतिषीय दृष्टिकोण से निम्नलिखित राशियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है:
-1783916827704.jpg)
(Picture Credit: AI Generated)
मिथुन राशि: इस समय मानसिक तनाव और स्वास्थ्य नरम रह सकता है। इस दौरान अज्ञात भय या भ्रम की स्थिति बन सकती है। अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखें, नहीं तो अपनों से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। इस अवधि में वाद-विवाद से दूर रहना ही आपके लिए बेहतर होगा
कर्क राशि: इस दौरान भावनात्मक निर्णय लेने से बचें, नहीं तो धन-हानि होने का डर रहेगा। चंद्रमा की स्थिति के कारण मन विचलित रह सकता है। इस समय कोई भी बड़ा आर्थिक निवेश करने से पूरी तरह बचें और भावनाओं में बहकर कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय न लें।
खबरें और भी
वृश्चिक राशि: कार्यक्षेत्र में तनाव और दुर्घटना होने का डर बना रहेगा। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। गुप्त शत्रुओं से सतर्क रहें, जो आपकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाकर चलें।
मीन राशि: पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। परिवार के सदस्यों के साथ किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है। सेहत के प्रति बिल्कुल लापरवाही न बरतें, विशेषकर अपने खान-पान का पूरा ध्यान रखें।
अमावस्या के प्रभाव को कम करने के सरल उपाय
अमावस्या के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए इस दिन नीचे लिखे उपाय किए जा सकते हैं:
दान-पुण्य: इस पावन तिथि पर अपनी श्रद्धा के अनुसार तिल, वस्त्र या अन्न का दान करें।
पितृ तर्पण: अमावस्या तिथि पूरी तरह पितरों को समर्पित है, इसलिए उनके निमित्त तर्पण या धूप देकर उनका स्मरण करें।
मंत्र जाप: भगवान शिव की शरण में रहें और 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम एक माला मानसिक जप अवश्य करें।
अमावस्या की तिथि समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 13 जुलाई को शाम 06 बजकर 50 पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 14 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी।
यह भी पढ़ें- घर में रहता है क्लेश और कंगाली, कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं पितृ दोष?
यह भी पढ़ें- सोमवती अमावस्या और सामान्य अमावस्या में क्या अंतर है? जानें इसका धार्मिक महत्व
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।