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    सोमवती अमावस्या और सामान्य अमावस्या में क्या अंतर है? जानें इसका धार्मिक महत्व

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 12:30 PM (GMT+05:30)

    सोमवती अमावस्या सामान्य अमावस्या से भिन्न है क्योंकि यह सोमवार को पड़ती है, जिससे इसका धार्मिक महत्व बढ़ जाता है और यह भगवान शिव को समर्पित होती है। ...और पढ़ें

    सामान्य अमावस्या से कितनी अलग है सोमवती अमावस्या? (AI-Generated Image)

    सामान्य अमावस्या से कितनी अलग है सोमवती अमावस्या? (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. सोमवती अमावस्या सोमवार को पड़ने से महत्व बढ़ जाता है।

    2. यह भगवान शिव और पितरों के तर्पण के लिए खास है।

    3. गंगा स्नान, दान और पीपल पूजा का विशेष फल मिलता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के आधार पर हर महीने अमावस्या तिथि आती है, जब चंद्रमा पूरी तरह से गायब हो जाता है। धार्मिक नजरिए से अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित मानी जाती है।

    लेकिन अमावस्या की तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। आइए जानते हैं कि सोमवती अमावस्या और सामान्य अमावस्या में क्या अंतर है?

    दोनों अमावस्या के बीच प्रमुख अंतर?

    सामान्य अमावस्या से अभिप्राय हर महीने की अलग-अलग तिथि पर होने वाली अमावस्या, जिसका संबंध मुख्य रूप से पितृ से जुड़े कार्यों, तर्पण, श्राद्ध और दान से माना जाता है। वहीं सोमवती अमावस्या में अमावस्या तिथि के साथ सोमवार का भी खास संयोग होता है।

    सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए खास माना जाता है, इसलिए इस दिन अमावस्या का धार्मिक महत्व है, सामान्य अमावस्या से कई गुना बढ़ जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों में सोमवार का दिन चंद्रमा और भगवान शिव दोनों को समर्पित है। अमावस्या के मौके पर चंद्रमा की रोशनी क्षीण अवस्था में आ जाती है। इस साल सोमवती अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार के दिन पड़ रही है, जिस वजह इस तिथि पर शिव आराधना करना विशेष फलदायी मानी जाती है।

    सोमवती अमावस्या और सामान्य अमावस्या में क्या अंतर

    शास्त्रों में सोमवती अमावस्या का उल्लेख

    सोमवती अमावस्या का उल्लेख स्कंद पुराण, पद्म पुराण और भविष्योत्तर जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी है। इन ग्रंथों के अनुसार इस खास दिन पर दान, पुण्य, गंगा स्नान, जप-तप, पूजा और व्रत का खास महत्व है।

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    इसके अलावा अधिकांश लोग पीपल के पेड़ की भी पूजा करते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों वास करते हैं, जिस वजह से इस खास तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

    कई स्थानों पर विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए सोमवती अमावस्या पर व्रत भी रखती हैं।

    धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि, सोमवती अमावस्या का दिन खासतौर से पितरों से जुड़े कार्य जैसे, श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण के लिए खास माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से पितृ संतोष होते हैं।

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