सोमवती अमावस्या के दिन इस एक गलती से नाराज होंगे पूर्वज, अभी पढ़ लें जरूरी नियम
इस बार की सोमवती अमावस्या बेहद मानी जा रही है, क्योंकि यह अमावस्या ज्येष्ठ अधिक मास में मनाई जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन कौन-से काम नहीं कर ...और पढ़ें

सोमवती अमावस्या के नियम (Picture Credit AI- Generated Image)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 जून को ज्येष्ठ अधिक अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन सोमवार होने की वजह इसे सोमवती अमावस्या कहा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
शास्त्रों में अमावस्या से जुड़े नियम के बारे में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन कुछ गलतियों को करने से साधक को पितरों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है और जीवन में कई समस्याएं आ सकती हैं, तो ऐसे में आइए इस लेख में आपको बताते हैं कि सोमवती अमावस्या के दिन किन गलतियों को करने से बचना चाहिए।
-1780907135735.jpg)
(Picture Credit AI- Generated Image)
1. तामसिक भोजन और नशीली चीजों का सेवन- अमावस्या के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। जैसे- मांस, मछली, अंडा, लहसुन, प्याज आदि। ऐसा माना जाता है कि तामसिक भोजन का सेवन करने से पितृ अत्यंत क्रोधित होते हैं और घर में बरकत रुक जाती है।
2. किसी का अनादर या वाद-विवाद करना- सोमवती अमावस्या के दिन किसी बुजुर्ग, असहाय, या माता-पिता का अपमान न करें। घर में शांति और प्रेम का माहौल होना चाहिए। घर से किसी जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं। ऐसा माना जाता है कि इस तरह की गलती को करने से जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
खबरें और भी
3. बाल, नाखून काटना और दाढ़ी बनाना- सोमवती अमावस्या के दिन बाल काटना, नाखून काटना या शेविंग वर्जित माना गया है। इस नियम का पालन न करने से पितृ दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
4. पीपल के पेड़ को काटना- धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल के पेड़ में त्रिदेवों और पितरों का वास माना गया है। इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ को काटना नहीं चाहिए। इस दिन स्नान करने के बाद पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल के पेड़ को काटने से व्यक्ति को महापाप लगता है।
सोमवती अमावस्या 2026 डेट और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 15 जून को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर होगा। ऐसे में सोमवती अमावस्या 15 जून को मनाई जाएगी।
यह भी पढ़ें- साल 2026 में इस दिन से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, जानें श्राद्ध का पूरा कैलेंडर?
यह भी पढ़ें- ज्येष्ठ अमावस्या 2026 कब है? नोट करें शुभ-अशुभ मुहूर्त और न खरीदी जाने वाली चीजों की लिस्ट
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।