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    साल 2026 में इस दिन से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, जानें श्राद्ध का पूरा कैलेंडर?

    Updated: Sat, 06 Jun 2026 07:40 PM (IST)

    हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जो 26 सितंबर 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद ...और पढ़ें

    साल 2026 में पितृ पक्ष की डेट (Picture Credit AI- Generated Image)

    साल 2026 में पितृ पक्ष की डेट (Picture Credit AI- Generated Image)

    HighLights

    1. 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा पितृ पक्ष।

    2. पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद के लिए महत्वपूर्ण।

    3. तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का खास आध्यात्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, श्राद्ध पक्ष अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होता है और ठीक 15 दिन के बाद अमावस्या को समाप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि, इस दौरान पूर्वजों की आत्माएं पृथ्वी पर किसी न किसी रूप में आती है।

    इसलिए उनके प्रति श्रद्धा जाहिर करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। इन अनुष्ठानों से पूर्वज खुश होते हैं और वे परिवार को सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं।

    साल 2026 में पितृ पक्ष कब शुरू हो रहा है?

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, अश्विन माह भाद्रपद माह की पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। साल 2026 में अश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो रही है। यह अवधि 10 अक्तूबर 2026 सर्वपित्री अमावस्या के दिन समाप्त होगी।

    पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान किए जाने वाले श्राद्ध और तर्पण अनुष्ठानों से पूर्वज प्रसन्न होते हैं औऱ अपनी संतानों को खुश रहने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

    ऐसा भी माना जाता है कि, इन अनुष्ठानों से दीर्घायु, धन, ज्ञान, संतान प्राप्ति का सुख और जीवन में समग्र समृद्धि प्राप्त होती है। इसके अलावा व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होता है।

    पितृ पक्ष 2026

    पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध की प्रमुख तिथियां

    26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध

    27 सितंबर 2026 को प्रतिपदा श्राद्ध

    28 सितंबर 2026 को द्वितीया श्राद्ध

    29 सितंबर 2026 को तृतीया श्राद्ध

    20 सितंबर 2026 को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध

    1 अक्तूबर 2026 को षष्ठी श्राद्ध

    2 अक्टूबर 2026 को सप्तमी श्राद्ध

    3 अक्टूबर 2026 को अष्टमी श्राद्ध

    4 अक्टूबर 2026 को नवमी श्राद्ध

    5 अक्टूबर 2026 को दशमी श्राद्ध

    6 अक्टूबर 2026 को एकादशी श्राद्ध

    7 अक्टूबर 2026 को द्वादशी और माघ श्राद्ध

    8 अक्टूबर 2026 को त्रयोदशी श्राद्ध

    9 अक्टूबर 2026 को चतुर्दशी श्राद्ध

    10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या

    तर्पण करने की विधि

    पितृ पक्ष के दौरान रोजाना या पितरों की पुण्यतिथि पर तर्पण करना शुभ माना जाता है। दोपहर के समय दक्षिणमुखी मुख करके जल अर्पित किया जाता है। तर्पण करते समय जल में काले तिल को मिलाकर हाथ में कुश घास धारण करके पूर्वजों को श्राद्धपूर्वक याद करना चाहिए।

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    भोजन, कपड़े और अन्य वस्तुओं का दान करना, इसके साथ ही तर्पण अनुष्ठान के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इससे पूर्वजों का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि का वातावरण कायम रहता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।