पहले बड़े मंगल पर क्या चढ़ाएं? जानें हनुमान जी के पसंदीदा भोग और महत्व
आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि हनुमान जी के प्रिय भोग क्या हैं? ...और पढ़ें

Bada Mangal 2026: बजरंगबली को क्यों प्रिय हैं ये खास पकवान? Ai Generated image

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जेठ के महीने में पड़ने वाले मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ में इसका विशेष महत्व है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी प्रेम और सेवा भाव को भी दिखाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन हनुमान जी की मुलाकात भगवान श्रीराम से हुई थी। इस दिन को लेकर लोगों की अपनी -अपनी मान्यताएं हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में भगवान हनुमान के प्रिय भोग के बारे में जानते हैं।

Ai Generated image
बड़े मंगल पर हनुमान जी के प्रिय भोग
- बूंदी के लड्डू - हनुमान जी को बूंदी के लड्डू बहुत प्रिय हैं। ऐसी मान्यता है कि इसे चढ़ाने से ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
- बेसन के लड्डू - शुद्ध घी में बने बेसन के लड्डू अर्पित करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- इमरती और जलेबी - कई भक्त इस दिन केसरिया इमरती का भोग भी लगाते हैं, जो बजरंगबली को बहुत पसंद है।
- तुलसी दल - भोग में तुलसी दल जरूर डालें, क्योंकि इसके बिना हनुमान जी भोग स्वीकार नहीं करते।
- पान का बीड़ा - कामों में सफलता के लिए हनुमान जी को मीठा पान (गुलकंद, सौंफ वाला) चढ़ाना शुभ होता है।
- रोट का भोग - गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना रोट बड़े मंगल पर विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।
बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में जब हनुमान जी प्रभु राम से पहली बार मिले थे, तब ज्येष्ठ माह का मंगलवार ही था। इसके अलावा, इसी अवधि में वीर बजरंगी ने महाबली भीम का अहंकार एक वृद्ध वानर का रूप धारण कर तोड़ा था, जिसके चलते इसे 'बुढ़वा मंगल' के रूप में भी पूजा जाता है। कहते हैं कि इस दिन दान-पुण्य और भंडारे का दोगुना फल मिलता है।
करें ये काम
बड़े मंगल के दिन केवल मंदिर जाना ही काफी नहीं है, बल्कि इस दिन जरूरतमंदो को पानी पिलाना और भोजन कराना हनुमान जी की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। ऐसे में श्रद्धा के साथ ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य करें।
यह भी पढ़ें- ज्येष्ठ माह का 'बड़ा मंगल': हनुमान जी की कृपा पाने के लिए जरूर अर्पित करें ये चीजें
यह भी पढ़ें- ज्येष्ठ माह में क्यों मनाया जाता है 'बड़ा मंगल'? पढ़ें बुढ़वा मंगल की पौराणिक कथा और महत्व
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।