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    Bhagavad Gita Shloka: मन की अशांति से हैं परेशान? गीता का यह एक श्लोक आपको दिलाएगा मानसिक शांति

    Updated: Wed, 04 Feb 2026 08:00 PM (IST)

    Bhagavad Gita Wisdom: मन को शांत करने और खुद से जुड़ने के लिए गीता का यह श्लोक एक मार्गदर्शक की तरह है। जानें कैसे अपनी इंद्रियों को वश में कर आप सुकून ...और पढ़ें

    गीता का दिव्य संदेश (Image Source: Freepik)

    गीता का दिव्य संदेश (Image Source: Freepik)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद से दूर हो जाते हैं। मन में विचारों का शोर इतना बढ़ जाता है कि हम चाहकर भी शांति महसूस नहीं कर पाते। श्रीमद्भगवद्गीता (Bhagavad Gita) का एक विशेष श्लोक हमें वापस उसी अंतर्मन की शांति (Inner Stillness) से जुड़ने का रास्ता दिखाता है।

    श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक मनोवैज्ञानिक गाइड भी है। जब अर्जुन कुरुक्षेत्र के मैदान में भ्रमित थे, तब भगवान कृष्ण ने उन्हें जो उपदेश दिए, वे आज के दौर में हमारे मानसिक तनाव को दूर करने के लिए भी उतने ही सटीक हैं।

    Arjun Mahabharat

    (Image Source: Free)

    इंद्रियों पर नियंत्रण और शांति का सूत्र

    धार्मिक ग्रंथों और गीता के अनुसार, भगवान कृष्ण ने दूसरे अध्याय का 58वां श्लोक 'स्थितप्रज्ञ' में एक बहुत गहरी बात कही है। शास्त्रों के मुताबिक, जो व्यक्ति राग (लगाव) और द्वेष (नफरत) से मुक्त होकर अपनी इंद्रियों को अपने वश में कर लेता है, वही असली शांति प्राप्त करता है।

    श्लोक: यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः | इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता || 58 ||

    अर्थ- जिस प्रकार एक कछुआ सब ओर से अपने अंगों को समेटकर अपने भीतर छिपा लेता है, वैसे ही जब कोई मनुष्य अपनी इंद्रियों (आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) को उनके विषयों (रूप, शब्द, गंध, स्वाद, स्पर्श) से पूरी तरह हटाकर अपने वश में कर लेता है, तब उसकी बुद्धि स्थिर मानी जाती है।

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    आज के जीवन में इसे कैसे लागू करें?

    आज हम सोशल मीडिया, काम के दबाव और बाहरी शोर से घिरे हैं। आध्यात्मिक सुझाव के अनुसार, अगर हम रोज कुछ समय निकालकर इस श्लोक का मनन करें, तो हम बाहरी परिस्थितियों के गुलाम होने के बजाय अपने मन के मालिक बन सकते हैं। जब मन शांत होता है, तो निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और जीवन का आनंद दोगुना हो जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।