बार-बार चिंता करना क्यों माना गया कमजोरी का संकेत? श्रीकृष्ण ने बताया मन को संभालने का तरीका
भगवद गीता के श्लोक 2.14 में भगवान कृष्ण ने चिंता, सुख-दुख और मानसिक अशांति को लेकर गहरी सीख दी है। इस आर्टिकल में पढ़ें इससे जुड़े श्लोक का अर्थ और जी ...और पढ़ें

कैसे करें अपनी चिंता को कम? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चिंता लगभग हर इंसान की समस्या बन चुकी है। कभी भविष्य की चिंता, कभी करियर का डर, तो कभी रिश्तों और पैसों की टेंशन। कई बार हम छोटी-छोटी बातों को लेकर इतना ज्यादा सोचने लगते हैं कि मन अशांत हो जाता है और जीवन का सुख कहीं खो जाता है। लेकिन, हजारों साल पहले कही गई भगवद गीता (Bhagavad Gita) की शिक्षाएं आज भी हमें मानसिक शांति का रास्ता दिखाती हैं।
श्रीकृष्ण ने गीता में अर्जुन को समझाते हुए कहा था कि जीवन में सुख और दुख हमेशा आते-जाते रहते हैं। गीता के श्लोक 2.14 में कहा गया है कि "इंद्रियों और विषयों के संपर्क से सुख और दुख पैदा होते हैं। ये बिल्कुल सर्दी और गर्मी की तरह हैं, जो कुछ समय के लिए आते हैं और फिर चले जाते हैं। इसलिए, व्यक्ति में इतनी सहनशक्ति होनी चाहिए कि धैर्य के साथ इन्हें सहन कर सके।
जीवन का एक हिस्सा है चिंता
संस्कृत में ‘आगमपायिनो’ शब्द का अर्थ होता है ‘आना और जाना’। यानी चिंता कोई स्थायी चीज नहीं है। यह सिर्फ कुछ समय के लिए हमारे मन और जीवन में आती है। लेकिन, जब इंसान बार-बार चिंता करता है, तो वह अपने मन को कमजोर बना लेता है। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास कम होने लगता है और वह हर परिस्थिति से डरने लगता है।
इंसान को क्यों सताता है 'भविष्य का भय'
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः
भगवान कृष्ण के अनुसार, चिंता का सबसे बड़ा कारण भविष्य का भय है। इंसान उन चीजों के बारे में सोचकर परेशान होता रहता है, जो अभी हुई ही नहीं हैं। यही वजह है कि उसका मन वर्तमान से हटकर डर और भ्रम में फंस जाता है। गीता हमें सिखाती है कि हमें अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, न कि उसके परिणाम की चिंता करनी चाहिए।
खबरें और भी
मौसम की तरह बदलते हैं सुख-दुख
जब भी मन में बेचैनी बढ़े, तो यह याद रखना जरूरी है कि हर कठिन समय हमेशा नहीं रहता। जैसे मौसम बदलता है, वैसे ही जीवन की परिस्थितियां भी बदल जाती हैं। अगर इंसान धैर्य, विश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखे, तो वह चिंता पर आसानी से जीत पा सकता है।
भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला ज्ञान का भंडार है। इसकी शिक्षाएं आज भी लोगों को मानसिक तनाव, डर और चिंता से बाहर निकलने की प्रेरणा देती हैं।
यह भी पढ़ें- कलयुग की मुश्किलों से पार कैसे पाएं? श्रीमद्भगवद गीता में छिपे हैं ये 5 अचूक मंत्र
यह भी पढ़ें- गीता के इस श्लोक ने बनाया ऐश्वर्या राय के कान्स लुक को खास, क्या आप जानते हैं इसका सार?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।