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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Mata Lakshmi katha: भगवान विष्णु की शर्त भूल गईं थी मां लक्ष्मी, लेना पड़ा था गरीब कन्या का रूप

    Updated: Fri, 03 Jan 2025 01:53 PM (IST)

    धन की देवी मां लक्ष्मी को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी के रूप में जाना जाता है। साथ ही लक्ष्मी जी को धन की देवी के रूप में भी पूजा जाता है क्योंकि उनकी ...और पढ़ें

    Mata Lakshmi katha लक्ष्मी जी ने क्यों लिया गरीब कन्या का रूप।
    Mata Lakshmi katha लक्ष्मी जी ने क्यों लिया गरीब कन्या का रूप।

    HighLights

    1. जगत के पालनहार कहलाते हैं श्रीहरि।
    2. भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं मां लक्ष्मी।
    3. भगवान विष्णु की शर्त भूल गईं थी मां लक्ष्मी।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसी कई पौराणिक कथाएं मिलती है, जो व्यक्ति को प्रेरित करने के साथ-साथ हैरत में भी डाल देती हैं। आज हम आपको भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से जुड़ी एक ऐसी ही कथा बताने जा रहे हैं। जिसके अनुसार, भगवान विष्णु की शर्त भूलने के कारण धन की देवी लक्ष्मी को एक गरीब कन्या का रूप धारण करना पड़ा था। चलिए जानते हैं वह कथा।  

    भ्रमण पर निकले विष्णु जी

    कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु धरती पर भ्रमण के लिए निकल रहे थे। तभी देवी लक्ष्मी ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई। लेकिन प्रभु श्रीहरि ने लक्ष्मी जी के सामने यह शर्त रखी कि पृथ्वी पर चाहे कैसी भी परिस्थिति आए, उन्हें उत्तर दिशा की ओर नहीं देखना है। इस शर्त को मानते हुए लक्ष्मी जी भी श्रीहरि के साथ चल पड़ीं।

    (Picture Credit: Freepik)

    लक्ष्मी जी को हुआ गलती का आभास

    जब माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु धरती पर भ्रमण कर रहे थे, तभी देवी की नजर उत्तर दिशा में स्थित एक बगीचे पर पड़ी। वहीं इतनी हरियाली थी कि लक्ष्मी जी खुद को उसकी ओर जाने से रोक नहीं पाईं। वह बगीचे से एक फूल तोड़कर भगवान विष्णु जी के पास आ गईं।

    लक्ष्मी जी को देखकर विष्णु जी उदास होकर बोले कि बिना पूछे किसी की वस्तु को लेना अपराध होता है। यह बात सुनकर मां लक्ष्मी को वह शर्त याद आ गई, जो भ्रमण पर निकलने से पहले विष्णु जी ने देवी लक्ष्मी के सामने रखी थी। देवी लक्ष्मी ने अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने विष्णु जी से क्षमा याचना की।

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    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

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    गरीब माली के घर किया काम

    इसपर श्री हरि कहते हैं कि आपको केवल बगीचे का माली ही माफ कर सकता है। इसके लिए आपको माली के घर तीन वर्षों तक रहकर उसकी सहायता करनी होगी। यह सुनते ही लक्ष्मी जी ने एक गरीब कन्या का रूप धारण किया और माधव नामक माली के घर चली गईं।

    तीन वर्ष पूरे होने के बाद जब माली को यह पता चला कि वह कन्या कोई और नहीं स्वयं देवी लक्ष्मी थी, तो वह रोने लगा। उसने देवी लक्ष्मी से माफी मांगी। तब लक्ष्मी जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है। माली ने लक्ष्मी जी को अपने परिवार के सदस्य की तरह रखा था, इसलिए लक्ष्मी जी ने उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया और विष्णु लोक लौट गईं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।