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बंगाल में भाई दूज को क्यों कहते हैं भाई फोटा, बहनें भाई के माथे पर क्यों लगाती हैं काजल और दही का तिलक?

Published: Fri, 06 Nov 2026 04:55 PM (IST)

बंगाल में भाई दूज को भाई फोटा क्यों कहते हैं? जानें बहनें भाई के माथे पर काजल और दही का ...और पढ़ें

बंगाल में भाई दूज का अनोखा पर्व । (Picture Credit- AI Generated)

बंगाल में भाई दूज का अनोखा पर्व । (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. बहनें भाइयों के माथे पर दही, काजल, चंदन का तिलक लगाती हैं।

  2. तिलक लगाते समय विशेष बंगाली मंत्र का उच्चारण किया जाता है।

  3. यह पर्व यम-यमुना कथा और अटूट भाई-बहन प्रेम का प्रतीक है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में भाई दूज का त्योहार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में इसे 'भाई फोटा' के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रिश्ते की मिठास का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति अपना प्यार जताते हैं। चलिए इस परंपरा के बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

काजल और दही के तिलक की खास परंपरा

भाई फोटा की सबसे खास परंपरा माथे पर तिलक लगाने की है। बंगाल में इसे 'फोटा' कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर छोटी उंगली यानी कनिष्ठा से तिलक लगाती हैं। इस तिलक में दही, काजल और चंदन का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ परिवारों में घी की कालिख से बना काजल भी लगाया जाता है। इसके अलावा चावल और दूर्वा घास से भाई को आशीर्वाद देने की परंपरा भी है। माना जाता है कि यह तिलक भाई को बुरी नजर और परेशानियों से बचाता है।

तिलक लगाते समय पढ़ा जाता है विशेष मंत्र

भाई फोटा के दिन तिलक लगाते समय बहनें एक पारंपरिक बंगाली मंत्र बोलती हैं।

"भ्रातूर कपाले दिलाम फोटा, जमेर दुआरे पडल कांटा।"

इसका अर्थ है कि बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर यमराज के रास्ते में बाधा डाल रही है, ताकि उसके भाई को लंबी उम्र मिले और वह हमेशा सुरक्षित रहे।

यमराज और यमुना से जुड़ी मान्यता

भाई फोटा का संबंध यमराज और उनकी बहन यमुना की पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर बुलाकर उनका स्वागत किया और उनके माथे पर तिलक लगाया था। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया था। इसी कथा के आधार पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं।

शंख और उलू ध्वनि से गूंजते हैं घर

इस त्योहार पर बंगाली घरों में खास उत्साह देखने को मिलता है। तिलक की रस्म के दौरान शंख बजाया जाता है। महिलाएं 'उलू ध्वनि' भी करती हैं। यह एक पारंपरिक मांगलिक ध्वनि है, जिसे शुभ अवसरों पर निकाला जाता है। कई परिवारों में बहनें पूजा पूरी होने तक व्रत भी रखती हैं।

भाई-बहन के प्रेम का मीठा भोज

तिलक की रस्म पूरी होने के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। इसके बाद घर में खास पकवानों का आयोजन होता है। बंगाली परिवारों में लूची, छोलार दाल, मिठाई, संदेश और रसगुल्ले जैसे स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। कई घरों में भाई की पसंद का मछली या मटन का भोजन भी तैयार किया जाता है।

अत: बंगाल का यह खूबसूरत त्योहार हमें याद दिलाता है कि भाई-बहन का रिश्ता अनमोल होता है। काजल, दही और चंदन का छोटा-सा तिलक इस रिश्ते में छिपे बड़े प्यार और आशीर्वाद को दर्शाता है।

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