Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Bhishma Ashtami 2026: क्यों खास है भीष्म अष्टमी, इस व्रत को करने से मिलते हैं ये लाभ

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 11:25 AM (IST)

    माना जाता है कि इस श्राद्ध को करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिससे साधक को पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है। चलिए जानते हैं भीष्म अष्टमी ...और पढ़ें

    Bhishma Ashtami vrat का महत्व

    Bhishma Ashtami vrat का महत्व

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था। बाणों की शैय्या पर असहाय कष्ट के बाद भी भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य उत्तरायण की प्रतीक्षा की। उन्होंने अपने प्राण माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर त्यागे थे, इसलिए इस दिन को भीष्म अष्टमी (Bhishma Ashtami 2025) के रूप में जाना जाता है। इस साल भीष्म अष्टमी सोमवार, 26 जनवरी को पड़ रही है।

    भीष्म अष्टमी मुहूर्त 

    माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 जनवरी को रात 11 बजकर 10 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस के समापन की बात की जाए, तो यह तिथि 26 जनवरी को रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहने वाली है। इस दिन पर श्राद्ध कर्म के लिए मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा -

    मध्याह्न समय - सुबह 11 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक

    Bhishma Ashtami i

    भीष्म अष्टमी का महत्व (Bhishma Ashtami significance)

    भीष्म, शांतनु और माता गंगा के पुत्र हैं, जिन्हें उनके पिता ने इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था। इस वरदान के अनुसार, वह जब चाहें, अपने प्राण त्याग सकते थे। उन्होंने अपने प्राण त्यागने के लिए माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को चुना। भीष्म अष्टमी के दिन लोग भीष्म पितामह के लिए एकोदिष्ट श्राद्ध करते हैं। भीष्म अष्टमी यानी भीष्म पितामह की निर्वाण तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण आदि करना भी बहुत ही अच्छा माना जाता है। इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    व्रत करने से मिलता है ये लाभ

    भीष्म अष्टमी के दिन व्रत करने का भी विशेष महत्व है। यह माना गया है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही पितरों को शांति मिलती है। जातक पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस व्रत को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे करने से जातक को गौरवशाली और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन पर किए गए व्रत और तर्पण से साधक पर भीष्म पितामह का आशीर्वाद भी बना रहता है।

    खबरें और भी

    Bhishma Ashtami AI

    (AI Generated Image)

    कर सकते हैं ये काम

    भीष्म अष्टमी की मृत्यु के बाद पांडवों ने उनका श्राद्ध कर्म किया था। पितरों का श्राद्ध आदि करने के लिए इस तिथि को उत्तम माना जाता है। ऐसा करने से जातक पर पितरों की कृपा सदा बनी रहती है। साथ ही इस दिन पर दान करने के भी लाभ बताए गए हैं। आप इस दिन पर तिल, उबले हुए चावल, वस्त्र और अन्न आदि का दान कर सकते हैं, जिससे जीवन में सुख-शांति आती है। भीष्म अष्टमी के दिन पितृ स्तोत्र का पाठ करना भी लाभकारी होता है।

    यह भी पढ़ें- महाभारत का रहस्य, आखिर क्यों मां गंगा ने अपने ही 7 नवजात पुत्रों को नदी में डुबो दिया था?

    यह भी पढ़ें - कब और क्यों भीष्म पितामह ने त्यागे प्राण? वजह कर देगी हैरान

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।