Bhishma Ashtami 2026: क्यों खास है भीष्म अष्टमी, इस व्रत को करने से मिलते हैं ये लाभ
माना जाता है कि इस श्राद्ध को करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिससे साधक को पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है। चलिए जानते हैं भीष्म अष्टमी ...और पढ़ें

Bhishma Ashtami vrat का महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था। बाणों की शैय्या पर असहाय कष्ट के बाद भी भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य उत्तरायण की प्रतीक्षा की। उन्होंने अपने प्राण माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर त्यागे थे, इसलिए इस दिन को भीष्म अष्टमी (Bhishma Ashtami 2025) के रूप में जाना जाता है। इस साल भीष्म अष्टमी सोमवार, 26 जनवरी को पड़ रही है।
भीष्म अष्टमी मुहूर्त
माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 जनवरी को रात 11 बजकर 10 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस के समापन की बात की जाए, तो यह तिथि 26 जनवरी को रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहने वाली है। इस दिन पर श्राद्ध कर्म के लिए मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा -
मध्याह्न समय - सुबह 11 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक

भीष्म अष्टमी का महत्व (Bhishma Ashtami significance)
भीष्म, शांतनु और माता गंगा के पुत्र हैं, जिन्हें उनके पिता ने इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था। इस वरदान के अनुसार, वह जब चाहें, अपने प्राण त्याग सकते थे। उन्होंने अपने प्राण त्यागने के लिए माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को चुना। भीष्म अष्टमी के दिन लोग भीष्म पितामह के लिए एकोदिष्ट श्राद्ध करते हैं। भीष्म अष्टमी यानी भीष्म पितामह की निर्वाण तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण आदि करना भी बहुत ही अच्छा माना जाता है। इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्रत करने से मिलता है ये लाभ
भीष्म अष्टमी के दिन व्रत करने का भी विशेष महत्व है। यह माना गया है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही पितरों को शांति मिलती है। जातक पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस व्रत को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे करने से जातक को गौरवशाली और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन पर किए गए व्रत और तर्पण से साधक पर भीष्म पितामह का आशीर्वाद भी बना रहता है।
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कर सकते हैं ये काम
भीष्म अष्टमी की मृत्यु के बाद पांडवों ने उनका श्राद्ध कर्म किया था। पितरों का श्राद्ध आदि करने के लिए इस तिथि को उत्तम माना जाता है। ऐसा करने से जातक पर पितरों की कृपा सदा बनी रहती है। साथ ही इस दिन पर दान करने के भी लाभ बताए गए हैं। आप इस दिन पर तिल, उबले हुए चावल, वस्त्र और अन्न आदि का दान कर सकते हैं, जिससे जीवन में सुख-शांति आती है। भीष्म अष्टमी के दिन पितृ स्तोत्र का पाठ करना भी लाभकारी होता है।
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