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    हनुमान जी की आरती और पूजन विधि: दूसरे बड़े मंगल पर ऐसे पाएं पूजा का पूरा फल

    Updated: Tue, 12 May 2026 08:41 AM (GMT+05:30)

    ज्येष्ठ माह के दूसरे बड़े मंगल पर हनुमान जी की पूजा कैसे करनी है? आइए इस आर्टिकल में जानते हैं। ...और पढ़ें

    बड़े मंगल पर हनुमान जी की आरती और पूजन का सही नियम। Ai Generated Image

    बड़े मंगल पर हनुमान जी की आरती और पूजन का सही नियम। Ai Generated Image

    HighLights

    1. ज्येष्ठ माह के मंगलवार का बड़ा महत्व है

    2. यह हनुमान जी को समर्पित हैं 

    3. इस दौरान चमेली का तेल, सिंदूर, चोला चढ़ाना बेहद शुभ माना गया है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्येष्ठ महीने के मंगलवार, जिन्हें उत्तर भारत में बड़े मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। ये हनुमान जी की पूजा-अर्चना के लिए बहुत फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि इसी माह में हनुमान जी की मुलाकात भगवान श्री राम से हुई थी। आज यानी 12 मई 2026 को दूसरे बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। अगर इस दिन विधि-विधान से पूजा की जाए, तो जातक के जीवन के सभी मंगल दोष दूर होते हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

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    दूसरे बड़े मंगल की पूजन विधि

    • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के कपड़े पहनें।
    • हनुमान जी की प्रतिमा पर चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर चढ़ाएं। यह उन्हें बहुत प्रिय है और इससे ग्रहों की स्थिति अनुकूल होती है।
    • बजरंगबली को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू या फिर चने और गुड़ का भोग लगाएं। अगर हो पाए, तो इस दिन पान का बीड़ा भी चढ़ाएं।
    • आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक या सुंदरकांड का पाठ करें। 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
    • अंत में भाव के साथ आरती करें और पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।

    हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics)

    आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

    जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

    अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।

    दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।।

    लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।।

    लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।।

    लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।।

    पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।।

    बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।।

    सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।।

    कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।।

    लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।

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